🔹 कम पानी में बड़ा मुनाफा
मोती की खेती किसानों के लिए अतिरिक्त आय का मजबूत जरिया बन सकती है।
डॉ. अयूब हुसैन ने कहा कि कम पानी और सीमित संसाधनों में यह खेती संभव है।
🔹 कानपुर में हुआ प्रशिक्षण कार्यक्रम
भूमि संरक्षण कार्यालय में एकदिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य खेत तालाबों में मोती की खेती को बढ़ावा देना था।
🔹 वैज्ञानिक पद्धति से उत्पादन
डॉ. अयूब हुसैन के अनुसार मोती उत्पादन पूरी तरह वैज्ञानिक तकनीक पर आधारित है।
इससे कम समय में बेहतर लाभ मिलता है।
🔹 बाजार में भारी मांग
उन्होंने बताया कि गुणवत्तापूर्ण मोतियों की बाजार में लगातार मांग बनी हुई है।
कंपनी किसानों को उत्पादन से लेकर विपणन तक सहयोग देगी।
🔹 किसानों को व्यावसायिक अवसर
मणि एग्रो हब के निदेशक आनंद त्रिपाठी ने कहा कि मोती की खेती एक लाभकारी एग्री-बिजनेस है।
इससे पारंपरिक खेती के साथ आय बढ़ाई जा सकती है।
🔹 किसानों में उत्साह
कानपुर और उन्नाव के सैकड़ों किसानों ने प्रशिक्षण लिया।
वीरेन्द्र बहादुर सिंह, देवेन्द्र वर्मा और अमिता सचान जैसे किसानों ने रुचि दिखाई।
🔹 सरकारी अधिकारियों की मौजूदगी
कार्यक्रम में कृषि और मत्स्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
उन्होंने किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया।
🔹 कृषि में नया भविष्य
मोती की खेती अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रही है।
यह कम लागत में ज्यादा आमदनी का भरोसेमंद साधन बन रही है।




