मुकुल रॉय का निधन: चार दशक की रणनीतिक राजनीति का अंत, बंगाल ने खोया ‘चाणक्य’

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🔹 एक युग का अंत

मुकुल रॉय के निधन के साथ बंगाल की राजनीति का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया।
मुकुल रॉय राजनीतिक सफर करीब चार दशकों तक प्रभावशाली रहा।

वे संगठन क्षमता और रणनीति के लिए जाने जाते थे।
सही समय पर सही निर्णय लेना उनकी पहचान थी।

🔹 कांग्रेस से तृणमूल तक

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत कांग्रेस से की।
बाद में ममता बनर्जी के साथ मिलकर तृणमूल कांग्रेस को मजबूत किया।

मुकुल रॉय राजनीतिक सफर में तृणमूल की स्थापना अहम मोड़ साबित हुई।
वे संगठन के मुख्य रणनीतिकार माने जाते थे।

🔹 केंद्र की राजनीति में पहचान

वर्ष 2006 में वे राज्यसभा पहुंचे।
बाद में केंद्र में मंत्री पद भी संभाला।

मुकुल रॉय राजनीतिक सफर राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रभावशाली रहा।
उन्होंने रेल मंत्रालय की जिम्मेदारी निभाई।

🔹 भाजपा में नई भूमिका

वर्ष 2017 में उन्होंने भाजपा का दामन थामा।
भारतीय जनता पार्टी में रहते हुए संगठन विस्तार में योगदान दिया।

2019 लोकसभा चुनाव में भाजपा की सफलता में उनकी रणनीति चर्चा में रही।
हालांकि 2021 में वे फिर तृणमूल में लौट आए।

🔹 विवाद और स्वास्थ्य संघर्ष

उनका नाम कई विवादों में भी सामने आया।
स्वास्थ्य समस्याओं के कारण वे सक्रिय राजनीति से दूर हो गए।

मुकुल रॉय राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा।
फिर भी बंगाल की समकालीन राजनीति में उनकी भूमिका अहम रही।

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