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अमित शाह के बस्तर प्रवास से पहले नक्सलियों ने रखा शांति वार्ता का प्रस्ताव

जगदलपुर, 2 अप्रैल (हि.स.)। नक्सलियों ने केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बस्तर प्रवास से पहले केन्द्र व राज्य सरकारों के सामने शांति वार्ता का प्रस्ताव रखा है। नक्सली संगठन ने पिछले 15 महीनों में 400 साथी मारे जाने की बात स्वीकार करते हुए सरकारों से नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन रोकने की मांग की है। नक्सलियाें के इस प्रस्ताव पर राज्य के गृह मंत्री विजय कुमार ने कहा कि पर्चे की जांच कराई जा रही है। सरकार बातचीत के लिए तैयार है लेकिन इसके लिए उचित फाेरम बनाने की जरूरत है।

नक्सलियों की केंद्रीय समिति के प्रवक्ता अभय ने तेलगु भाषा में एक पर्चा जारी कर कहा है कि यदि राज्य और केंद्र सरकार नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन रोकती है तो हम शांति वार्ता के लिए तैयार हैं। नक्सलियों ने अपने पर्चे में यह उल्लेख किया गया है कि 24 मार्च को हैदराबाद में नक्सली संगठन की एक बैठक हुई थी। जिसमें बिना किसी शर्त के शांति वार्ता के लिए आगे आने और बातचीत तक युद्धविराम की घोषणा करने पर चर्चा हुई थी।

नक्सली प्रवक्ता अभय ने अपने पर्चे में कहा गया है कि हमारे दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के सदस्य और नक्सल संगठन के प्रतिनिधि विकल्प ने शांति वार्ता के लिए अपनी शर्त रखी थी कि जवानों को कैंप तक ही रखा जाए। ऑपरेशन को बंद किया जाए, जिसके बाद बातचीत करेंगे। इन शर्तों का जवाब दिए बगैर लगातार ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं। प्रवक्ता ने यह स्वीकार किया है कि पिछले 15 महीने में हमारे 400 से अधिक नेता, कमांडर, पीएलजीए के कई स्तर के लड़ाके मारे गए हैं और सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार कर उन्हें जेल में डाल दिया गया है। ऐसे में अब जनता के हित में हम सरकार से शांति वार्ता के लिए तैयार हैं।

नक्सली प्रवक्ता अभय ने कहा कि हम केंद्र और राज्य सरकार के सामने शांति वार्ता के लिए सकारात्मक माहौल बनाने का प्रस्ताव रख रहे हैं। हमारा प्रस्ताव है कि केंद्र और राज्य सरकारें छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र (गढ़चिरौली), ओडिशा, झारखंड, मध्य प्रदेश और तेलंगाना में ऑपरेशन के नाम पर हत्याओं को रोकें, नए सशस्त्र बलों के कैंप की स्थापना को रोकें। अगर केंद्र और राज्य सरकारें इन प्रस्तावों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देती हैं, तो हम तत्काल युद्धविराम की घोषणा कर देंगे।

राज्य के गृह मंत्री विजय शर्मा ने इस प्रस्ताव पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि वे इस पर्चे की जांच करवा रहे हैं। इस पर्चे में उठाये गए मुद्दों पर भी गौर करना होगा क्योंकि इसकी भाषा में सरकार पर युद्ध का आरोप है, जो आज की जमीनी हकीकत नहीं है। नक्सली संगठनों को चाहिए कि वे सरकार की पुनर्वास योजना का लाभ उठाएं और मुख्यधारा में शामिल हों। उन्होंने कहा की सरकार चर्चा के लिए तैयार है लेकिन इसके लिए उचित फोरम का निर्माण करना होगा।

उल्लेखनीय है कि केन्द्रीय मंत्री अमित शाह इसी सप्ताह 5 अप्रैल में बस्तर संभाग के नक्सल प्रभावित इलाका दंतेवाड़ा जाने का कार्यक्रम है। केन्द्रीय मंत्री शाह छत्तीसगढ़ की समृद्ध आदिवासी संस्कृति के उत्सव बस्तर पंडुम 2025 में लोक कलाकारों को सम्मानित करने का कार्यक्रम है।

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