नेपाल की राजनीति में एक बड़ा मोड़ आया है। राष्ट्रीय सभा (उच्च सदन) की 18 सीटों के लिए होने वाले चुनाव में प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की एमाले और शेरबहादुर देउबा की नेपाली कांग्रेस के बीच औपचारिक सीट-शेयरिंग समझौता हो गया है। इस समझौते के बाद पुष्पकमल दहल ‘प्रचंड’ की माओवादी सेंटर गठबंधन से बाहर हो गई है।
🤝 ओली–देउवा का समझौता
नामांकन के अंतिम दिन दोनों दलों के शीर्ष नेताओं—ओली और देउबा—ने गठबंधन को अंतिम रूप दिया।
सीटों के बंटवारे पर प्रचंड की आपत्ति के बाद उन्हें गठबंधन से अलग कर दिया गया।
समझौते के अनुसार:
- नेपाली कांग्रेस – 9 सीटें
- नेकपा (एमाले) – 8 सीटें
- 1 सीट मधेशी नेता महंत ठाकुर के लिए छोड़ी गई है, जिन्हें दोनों दलों का समर्थन मिलेगा।
🗳️ 25 जनवरी को मतदान
राष्ट्रीय सभा की 18 सीटों के लिए 25 जनवरी 2026 को मतदान होगा। ये चुनाव स्थानीय प्रतिनिधियों के माध्यम से अप्रत्यक्ष प्रणाली से कराए जाएंगे।
🧑💼 कांग्रेस के उम्मीदवार
नेपाली कांग्रेस ने विभिन्न प्रांतों से ये उम्मीदवार उतारे हैं:
- कोशी: सुनील थापा
- मधेस: धमेन्द्र पासवान, रणजीत कर्ण
- बागमती: गीता देवकोटा
- गण्डकी: जगत तिमिल्सिना
- लुम्बिनी: बासुदेव जंगली, चन्द्रबहादुर केसी
- कर्णाली: ललितबहादुर शाही
- सुदूरपश्चिम: खम्मबहादुर खाती
🧑💼 एमाले के उम्मीदवार
एमाले ने इन नेताओं को मैदान में उतारा है:
- कोशी: रोशनी मेचे
- बागमती: डॉ. प्रेमकुमार दंगाल
- गण्डकी: सम्झना देवकोटा
- लुम्बिनी: रामकुमारी झांक्री
- कर्णाली: मीना रखाल
- सुदूरपश्चिम: लीला कुमारी भण्डारी
🔥 प्रचंड का झटका
माओवादी सेंटर का बाहर होना नेपाल की राजनीति में बड़ा संकेत माना जा रहा है। इससे ओली-देउवा गठबंधन और मजबूत हुआ है, जबकि प्रचंड राजनीतिक रूप से अलग-थलग पड़ गए हैं।




