उदयपुर के एक व्यस्त चौक पर, 4 अक्टूबर 2026 को, महिला अधिकार मंच की युवतियों के बीच एक अनहोनी घटना घटी। एक सीजेपी कार्यकर्ता ने उनके संगोष्ठी में धक्का-मुक्की कर, प्रचार पोस्टर चुरा लिए। इस घटना ने नारीवादी समूहों के बीच आक्रोश और स्थानीय प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग को जन्म दिया।
उदयपुर में महिला अधिकार मंच पर हुई हिंसा
उदयपुर महिला अधिकार मंच (UDF) के युवा सदस्यों ने अपनी बैठक के दौरान अपने कार्यक्रम की जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रचार पोस्टर बंटाए। कार्यक्रम के अंत में, एक सीजेपी कार्यकर्ता, जिसे कुछ साक्षियों ने गाड़ी से उतरते हुए देखा, ने अचानक समूह के पास जाकर धक्का-मुक्की की। कुछ युवतियों ने उसे रोका, परंतु कार्यकर्ता ने उन्हें धक्का देते हुए पोस्टर चुरा लिए।
सीजेपी कार्यकर्ता की धक्का-मुक्की और पोस्टर चोरी
साक्षियों के अनुसार, कार्यकर्ता ने महिलाओं को दो बार धक्का दिया, जिससे एक युवा ने गिरकर अपनी कलाई पर चोट लगाई। उसने तुरंत पोस्टर चुरा लिए और गाड़ी में रखकर भाग गया। घटना के दौरान उपस्थित पत्रकार और समाजसेवकों ने तुरंत वीडियो रिकॉर्ड किया, जिसे बाद में सोशल मीडिया पर वायरल किया गया।
साक्षियों की गवाही और पुलिस की कार्रवाई
स्थानीय पुलिस ने 15 मिनट के भीतर घटना स्थल पर पहुँच कर जांच शुरू की। साक्षियों की गवाही और वीडियो फुटेज के आधार पर, पुलिस ने घटना की रिपोर्ट दर्ज की और सीजेपी कार्यकर्ता को ढूंढने के लिए गश्त बढ़ाई। कुछ ही घंटों में, पुलिस ने कार्यकर्ता को पकड़ लिया और उसे हिरासत में ले लिया। पुलिस ने कहा कि यह “हिंसा और संपत्ति की चोरी” के आरोप में है और उसे कड़ी सज़ा का सामना करना पड़ेगा।
समुदाय और सरकार की प्रतिक्रिया
उदयपुर महिला अधिकार मंच के अध्यक्ष ने घटना पर गहरा खेद व्यक्त किया और कहा कि “हमारी महिलाओं को सम्मान और सुरक्षा मिले, यह हमारा अधिकार है।” स्थानीय नारीवादी समूहों ने इस घटना को नारी हिंसा के एक नए रूप के रूप में देखा और पुलिस से त्वरित कार्रवाई की मांग की। शहर के मेयर ने भी एक बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने “किसी भी प्रकार की हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा” और “सभी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए कदम उठाए जाएंगे” कहा।
निष्कर्ष
इस घटना से स्पष्ट होता है कि नारी अधिकारों के संघर्ष में भी राजनीतिक दलों के भीतर हिंसा का खतरा बना हुआ है। पुलिस और प्रशासन को ऐसी घटनाओं पर कड़ी नजर रखकर शीघ्र कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही, समाज को महिलाओं के अधिकारों के प्रति जागरूक रहकर, किसी भी प्रकार के दमन के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। केवल तभी हम एक सुरक्षित और समान समाज की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।


