एआईआईबी) की प्रेसिडेंट से मुलाकात करते सीतारमण

सीतारमण ने एआईआईबी की प्रेसिडेंट के साथ महत्वपूर्ण बैठक में हिस्सा लिया, जो 29 सितंबर 2026 को हुई। इस बैठक में भारत की आर्थिक रणनीति और एशियाई अवसंरचना विकास के लिए नई साझेदारियों पर चर्चा की गई। एआईआईबी (एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इंवेस्टमेंट बैंक) की प्रेसिडेंट ने भारत के अवसंरचना परियोजनाओं के लिए वित्तीय समर्थन और तकनीकी सहायता पर प्रकाश डाला, जबकि सीतारमण ने भारत की जलवायु परिवर्तन से लड़ने की योजनाओं और हरित ऊर्जा पहलों को उजागर किया। इस बैठक का उद्देश्य भारत और एआईआईबी के बीच सहयोग को गहरा करना और क्षेत्रीय विकास को तेज़ी से आगे बढ़ाना था।

भारत की अवसंरचना की नई दिशा: एआईआईबी से मिलती है सीतारमण

सीतारमण ने बैठक में बताया कि भारत की अवसंरचना योजनाओं को एआईआईबी के बड़े निवेश से सुदृढ़ किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि 2030 तक भारत को 1.5 ट्रिलियन डॉलर के निवेश की आवश्यकता होगी, और एआईआईबी इसे वित्तीय सहायता के साथ तकनीकी मार्गदर्शन भी प्रदान कर सकता है। प्रेसिडेंट ने भी भारतीय परियोजनाओं के लिए अनुकूल शर्तों पर चर्चा की, जिससे भारत की आर्थिक वृद्धि को नई ऊर्जा मिलेगी। इस संवाद से स्पष्ट हुआ कि एआईआईबी भारत को विश्व के प्रमुख अवसंरचना प्रदाता के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

हरित ऊर्जा और जलवायु लक्ष्यों पर संयुक्त प्रयास

सीतारमण ने एआईआईबी से हरित ऊर्जा परियोजनाओं के लिए फंडिंग की मांग की। उन्होंने बताया कि भारत को 2030 तक 500 GW नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करनी है। एआईआईबी की प्रेसिडेंट ने इस लक्ष्य को समर्थन देने के लिए विशेष ऋण योजनाएँ और ग्रीन बॉन्ड जारी करने की बात कही। दोनों पक्षों ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए नई तकनीकों, जैसे कि कार्बन कैप्चर और स्टोरेज, पर भी चर्चा की। इस साझेदारी से भारत के पर्यावरणीय लक्ष्यों को तेज़ी से पूरा किया जा सकेगा।

डिजिटल अवसंरचना और स्मार्ट सिटी योजनाएँ

बैठक के दौरान डिजिटल अवसंरचना पर भी गहन चर्चा हुई। सीतारमण ने भारत के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत स्मार्ट सिटी योजनाओं के लिए एआईआईबी से फंडिंग की मांग की। एआईआईबी ने इस क्षेत्र में निवेश के लिए विशेष बांड जारी करने और सार्वजनिक-निजी साझेदारी मॉडल अपनाने का प्रस्ताव रखा। दोनों पक्षों ने एक साथ मिलकर डिजिटल गवर्नेंस, 5G नेटवर्क और साइबर सुरक्षा पर काम करने की योजना बनाई, जिससे भारत की डिजिटल अवसंरचना विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सके।

वित्तीय पारदर्शिता और जोखिम प्रबंधन

सीतारमण ने एआईआईबी से वित्तीय पारदर्शिता और जोखिम प्रबंधन पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि भारत के बड़े अवसंरचना परियोजनाओं में जोखिमों को कम करने के लिए एआईआईबी के साथ मिलकर एक जोखिम मूल्यांकन ढाँचा तैयार करना आवश्यक है। एआईआईबी ने इस दिशा में सहायता करने का वादा किया और दोनों पक्षों ने एक संयुक्त कार्य समूह बनाने का निर्णय लिया। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और परियोजनाओं की सफलता सुनिश्चित होगी।

निष्कर्ष से समाप्त करें

इस बैठक के परिणामस्वरूप भारत और एआईआईबी के बीच सहयोग की नई दिशा तय हुई। सीतारमण और एआईआईबी की प्रेसिडेंट ने अवसंरचना, हरित ऊर्जा, डिजिटल विकास और जोखिम प्रबंधन पर संयुक्त प्रयासों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। यह साझेदारी भारत के आर्थिक विकास को तेज़ी से आगे बढ़ाने के साथ-साथ एशिया के सतत विकास के लक्ष्यों को भी साकार करने में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

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