नीरू धांडा, एक युवा उद्यमी, ने 29 सितंबर 2026 को अपने नए फैशन ब्रांड “इकोवोग” की शुरुआत की, जो पूरी तरह से टिकाऊ और पुनर्नवीनीकरण सामग्री से बना है। यह पहल भारतीय फैशन उद्योग में एक नई दिशा दिखाती है, जहाँ पर्यावरणीय जागरूकता और नवीन डिज़ाइन का समन्वय है। धांडा के अनुसार, इकोवोग का उद्देश्य न केवल स्टाइलिश कपड़े बनाना है, बल्कि फैशन के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करना भी है। इस कदम के साथ, उन्होंने भारत के प्रमुख शहरी बाजारों में पहले ही अपने उत्पादों की बिक्री शुरू कर दी है, और आने वाले महीनों में वैश्विक स्तर पर विस्तार की योजना बना रहे हैं।
"नीरू धांडा: युवा उद्यमी की नई फैशन पहल"
नीरू धांडा का जन्म 1994 में मुंबई में हुआ और उन्होंने अपनी शिक्षा के दौरान ही फैशन और डिज़ाइन के प्रति गहरी रुचि दिखाई। स्नातक के बाद उन्होंने फैशन इंडस्ट्री में कई प्रतिष्ठित ब्रांड्स के साथ काम किया, जहाँ उन्होंने उत्पादन प्रक्रिया और आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन में दक्षता प्राप्त की। 2025 में, उन्होंने अपने अनुभव का उपयोग करते हुए इकोवोग की स्थापना की, जिसका मुख्य मिशन टिकाऊ फैशन को सुलभ और किफ़ायती बनाना है। इकोवोग के पहले कलेक्शन में 100% पुनर्नवीनीकरण पॉलिएस्टर और ऑर्गेनिक कॉटन का इस्तेमाल किया गया, जिससे उत्पादन के दौरान कार्बन फुटप्रिंट में 30% की कमी आई। धांडा का मानना है कि युवा पीढ़ी को पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाना और साथ ही उन्हें फैशन के नवीनतम ट्रेंड्स से जोड़ना उनका प्रमुख लक्ष्य है।
"सस्टेनेबल फैशन का नया युग: धांडा का दृष्टिकोण"
धांडा ने अपने इंट्रोडक्शन टॉक में कहा, “सस्टेनेबिलिटी सिर्फ एक ट्रेंड नहीं, बल्कि एक ज़रूरत है। हमें ऐसे उत्पाद बनाने चाहिए जो न केवल सुंदर हों, बल्कि पर्यावरण को भी सम्मान दें।” उन्होंने इकोवोग के उत्पादन केंद्रों में सौर ऊर्जा और जल पुनर्चक्रण प्रणालियों को अपनाने का निर्णय लिया है। इसके अलावा, उन्होंने ‘रिटर्न एंड री-यूज़’ प्रोग्राम शुरू किया है, जिसमें ग्राहक अपने पुराने कपड़ों को वापस करके नई डिस्काउंट कूपन पा सकते हैं। इस पहल से, इकोवोग ने पहले ही 10,000 से अधिक कपड़ों के टुकड़ों को पुनः उपयोग में लाया है, जिससे फैशन उद्योग में कचरे की मात्रा में उल्लेखनीय कमी आई है। धांडा का यह दृष्टिकोण भारतीय फैशन के लिए एक नया मानक स्थापित कर रहा है।
"उद्योग के विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया: धांडा की रणनीति"
फैशन उद्योग के कई प्रमुख विशेषज्ञों ने इकोवोग की रणनीति की सराहना की है। प्रख्यात फैशन कंसल्टेंट, अनीश पाटिल ने कहा, “धांडा का मॉडल दिखाता है कि कैसे स्थिरता और लाभप्रदता एक साथ चल सकती हैं।” इसके अलावा, पर्यावरण वैज्ञानिक, डॉ. सुमन चौधरी ने भी इकोवोग के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के प्रयासों की प्रशंसा की, यह कहते हुए कि “यह एक मॉडल है जिसे अन्य ब्रांड्स भी अपना सकते हैं।” उद्योग के भीतर धांडा की यह सकारात्मक प्रतिक्रिया उन्हें और अधिक निवेशकों तथा रिटेल पार्टनर्स के साथ सहयोग करने के लिए प्रेरित कर रही है।
"भविष्य की योजनाएं: धांडा का वैश्विक विस्तार"
इकोवोग का अगला लक्ष्य 2027 के अंत तक यूरोप और उत्तरी अमेरिका में अपनी उपस्थिति दर्ज कराना है। धांडा ने पहले ही जर्मनी और यूके के प्रमुख फैशन हब्स में पायलट स्टोर्स खोले हैं। इसके अलावा, वे ‘फैशन रीसाइक्लिंग’ के क्षेत्र में नई साझेदारियों की खोज कर रहे हैं, ताकि वैश्विक स्तर पर कपड़ों के कचरे को कम किया जा सके। इकोवोग के लिए, यह केवल एक व्यापारिक विस्तार नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर टिकाऊ फैशन के प्रति जागरूकता बढ़ाने का एक मिशन भी है।
निष्कर्ष
नीरू धांडा की इकोवोग पहल ने भारतीय फैशन उद्योग में एक नया अध्याय लिखा है। उन्होंने दिखा दिया कि कैसे नवाचार, स्थिरता और सामाजिक ज़िम्मेदारी को एक साथ मिलाकर एक सफल व्यापार मॉडल तैयार किया जा सकता है। जैसे-जैसे इकोवोग का वैश्विक विस्तार आगे बढ़ेगा, यह उम्मीद की जा रही है कि अन्य ब्रांड्स भी इसी मॉडल को अपनाकर फैशन के भविष्य को अधिक हरित और समावेशी बनाएंगे।



