राकेश चन्द्रवंशी, कांग्रेस के अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) समिति के राष्ट्रीय पर्यवेक्षक, पर 5 नवंबर 2026 को एक विवादास्पद घटना घटी। उनकी निजी कंप्यूटर (पीसी) को पुलिस ने जब्त कर लिया, और इसके पीछे के कारणों पर सवाल उठे। इस घटना ने कांग्रेस के अंदर और बाहर दोनों ही स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है।
राकेश चन्द्रवंशी की पीसी पर जब्त की गई वस्तुएँ
पुलिस ने बताया कि पीसी में कुछ संवेदनशील दस्तावेज़ और फाइलें पाई गईं, जिनमें राजनीतिक रणनीतियाँ, आंतरिक रिपोर्ट और कुछ अनधिकृत संचार शामिल थे। जब्त की गई फाइलों में ईबीसी समिति के कुछ निर्णयों की प्रतियाँ और पार्टी के प्रमुख अधिकारियों के बीच की ईमेल भी शामिल थीं। इस दौरान पुलिस ने पीसी के हार्ड ड्राइव को सील कर लिया और जांच के लिए अलग से रखा।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया और आंतरिक जांच
कांग्रेस के केंद्रीय सचिवालय ने तुरंत एक विशेष कार्यदल गठित किया और राकेश चन्द्रवंशी की ओर से एक बयान जारी किया। बयान में कहा गया कि पीसी पर मिले दस्तावेज़ पूरी तरह से वैध हैं और किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि का संकेत नहीं देते। पार्टी ने यह भी दावा किया कि पीसी जब्त करने के निर्णय में किसी भी तरह की राजनीतिक प्रेरणा नहीं थी। इसके अलावा, पार्टी ने आंतरिक जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति भी नियुक्त की है, जो पीसी के अंदर की फाइलों की वैधता पर रिपोर्ट तैयार करेगी।
कानूनी पहलू: पीसी जब्ती के नियम और प्रक्रियाएँ
कानूनी दृष्टिकोण से, पुलिस को किसी भी व्यक्तिगत उपकरण को जब्त करने के लिए स्पष्ट साक्ष्य और वैध कारण चाहिए। भारतीय दण्ड संहिता के तहत, किसी भी डिजिटल उपकरण पर जब्त की गई फाइलों को अदालत में साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, बशर्ते कि प्रक्रिया सही तरीके से पूरी हो। पीसी जब्त करने से पहले, पुलिस को एक नोटिस जारी करना आवश्यक है, जिसे राकेश चन्द्रवंशी को प्राप्त हुआ था। हालांकि, पार्टी ने यह दावा किया कि नोटिस का पालन नहीं किया गया और इसलिए यह प्रक्रिया अवैध है।
सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव: EBC समिति पर असर
इस घटना ने EBC समिति के भीतर असंतोष पैदा किया है। कुछ सदस्यों ने कहा कि यह कदम पार्टी के भीतर सत्ता संघर्ष का हिस्सा है। विपक्षी दलों ने इस मौके का फायदा उठाया और कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह अपनी आंतरिक नीतियों को लागू करने के लिए पुलिस का शोषण कर रही है। इससे पार्टी की सार्वजनिक छवि पर असर पड़ा और कुछ मतदाताओं में अविश्वास की भावना बढ़ी।
निष्कर्ष
राकेश चन्द्रवंशी की पीसी जब्ती की घटना ने राजनीतिक, कानूनी और सामाजिक तीनों स्तरों पर जटिल सवाल उठाए हैं। जबकि कांग्रेस ने अपनी वैधता और पारदर्शिता पर जोर दिया, विपक्ष और जनता की आलोचना भी तेज हो गई। आने वाले हफ्तों में आंतरिक जांच की रिपोर्ट और अदालत की सुनवाई इस मामले का निर्णायक फैसला तय करेगी। इस दौरान, यह स्पष्ट है कि किसी भी राजनीतिक संगठन के लिए अपने आंतरिक दस्तावेज़ों की सुरक्षा और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन अत्यंत आवश्यक है।


