उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन (फाइल फोटो )

0
23
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन (फाइल फोटो )

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने 2026 में देश को नई दिशा दी

सन् 2026 के अक्टूबर में, भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने अपने कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण पहलें शुरू कीं। 1975 में जन्मे राधाकृष्णन ने अपने करियर की शुरुआत एक शिक्षक के रूप में की, जहाँ से वे धीरे-धीरे राजनीति के क्षेत्र में प्रवेश कर राजनीति के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित नेता के रूप में उभरे। 2014 में कांग्रेस पार्टी के साथ उनका गठबंधन उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण रहा। उपराष्ट्रपति पद पर आने के बाद, उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल इंडिया के क्षेत्र में कई कार्यक्रमों की शुरुआत की, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में विकास की नई लहर दौड़ी।

शिक्षा क्षेत्र में नवाचार: डिजिटल कक्षा और पाठ्यपुस्तकें मुफ्त

राधाकृष्णन के नेतृत्व में ‘डिजिटल कक्षा’ कार्यक्रम ने 10 लाख से अधिक ग्रामीण छात्रों को इंटरनेट कनेक्शन और ऑनलाइन शिक्षण प्लेटफ़ॉर्म तक पहुँच प्रदान की। इसके साथ ही, सरकार ने सभी सरकारी स्कूलों के लिए पाठ्यपुस्तकें मुफ्त में उपलब्ध कराने का निर्णय लिया, जिससे शिक्षण में असमानता को कम किया गया।

स्वास्थ्य सुधार: ग्रामीण अस्पतालों का नवीनीकरण

उपराष्ट्रपति ने 2025 में ‘स्वास्थ्य सुधार योजना’ के तहत ग्रामीण अस्पतालों के नवीनीकरण और नई चिकित्सा सुविधाएँ स्थापित की। इस योजना के तहत, 200 से अधिक ग्रामीण अस्पतालों में आधुनिक उपकरण और प्रशिक्षित चिकित्सा स्टाफ उपलब्ध कराया गया, जिससे ग्रामीण इलाकों के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ मिलीं।

पर्यावरण संरक्षण: हरित भारत पहल

राधाकृष्णन ने ‘हरित भारत’ पहल के अंतर्गत देश के प्रमुख शहरों में वृक्षारोपण अभियान चलाया। 2026 में, 5 करोड़ पेड़ों की रोपाई का लक्ष्य रखा गया, और इस कार्यक्रम के तहत लाखों लोगों को वृक्षारोपण के महत्व के प्रति जागरूक किया गया।

डिजिटल समावेशन: साइबर सुरक्षा और डेटा गोपनीयता

डिजिटल इंडिया के क्षेत्र में राधाकृष्णन की भूमिका उल्लेखनीय रही। उन्होंने ‘साइबर सुरक्षा और डेटा गोपनीयता’ नीति को लागू किया, जिससे नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित हुई। इसके अलावा, ‘डिजिटल पहचान’ कार्यक्रम के तहत 30 लाख से अधिक लोगों को आधार कार्ड और अन्य डिजिटल पहचान पत्र जारी किए गए, जिससे सरकारी सेवाओं तक पहुँच आसान हुई।

निष्कर्ष

सीपी राधाकृष्णन का उपराष्ट्रपति पदकाल शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण और डिजिटल समावेशन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति का प्रतीक रहा। उनके द्वारा प्रारंभ की गई नीतियों और कार्यक्रमों ने भारत के विकास में एक नया अध्याय लिखा है। उनका कार्यकाल न केवल राष्ट्रीय स्तर पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी भारत की छवि को ऊँचा उठाने में सहायक रहा। उनकी दूरदर्शिता और समर्पण से यह स्पष्ट है कि भविष्य में भारत को और भी समृद्ध और समावेशी बनाने के लिए ऐसे नेता अनिवार्य हैं।