बस्तर के जूनियर बाल वैज्ञानिकों ने राज्य स्तरीय सेमिनार में किया उत्कृष्ट प्रदर्शन
बस्तर के युवा वैज्ञानिकों ने 17 अक्टूबर 2026 को आयोजित राज्य स्तरीय बाल विज्ञान सेमिनार में अपने शोध और प्रयोगों के दम पर सबका ध्यान खींच लिया। यह सेमिनार विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से आयोजित किया गया था, जिसमें 10 से अधिक राज्यों के 150 से अधिक जूनियर शोधकर्ताओं ने भाग लिया। बस्तर के प्रतिभागियों ने नयी ऊर्जा, रचनात्मकता और वैज्ञानिक सोच के साथ अपने प्रोजेक्ट्स प्रस्तुत किये, जिससे उन्हें राज्य स्तर पर मान्यता और पुरस्कार मिले।
बस्तर की युवा प्रतिभाओं ने दिखाया विज्ञान की शक्ति
बस्तर के 12 वर्ष के प्रतिभागियों ने अपने शोध विषयों में जल संरक्षण, जैव विविधता और नवीकरणीय ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित किया। एक टीम ने “सौर ऊर्जा से पानी शुद्धिकरण” पर काम किया, जबकि दूसरी ने “कृषि में बायोप्लास्टिक के प्रयोग” पर शोध प्रस्तुत किया। उनके प्रयोगों को वैज्ञानिकों ने उच्च मानदंडों के साथ स्वीकार किया, और उन्हें “सर्वश्रेष्ठ प्रोजेक्ट” का पुरस्कार मिला। इस प्रदर्शन ने दिखाया कि युवा दिमागों में भी गहरी वैज्ञानिक समझ और नवाचार की क्षमता है।
प्रायोजकों और शिक्षकों ने किया प्रशंसा
सेमिनार के दौरान बस्तर के शिक्षकों और स्थानीय प्रायोजकों ने अपने छात्रों की मेहनत और समर्पण की प्रशंसा की। शिक्षा विभाग के आयुक्त ने कहा, “हमारे यहाँ के युवा वैज्ञानिकों ने विज्ञान के प्रति गहरा लगाव दिखाया है। यह उपलब्धि हमें गर्व से भर देती है।” प्रायोजक कंपनियों ने भी भविष्य में इन छात्रों को इंटर्नशिप और शोध के अवसर देने का वादा किया, जिससे उनके व्यावसायिक विकास में मदद मिलेगी।
विज्ञान शिक्षण के नए मॉडल पर चर्चा
सेमिनार के दौरान एक पैनल चर्चा भी हुई, जिसमें शिक्षा नीति निर्माताओं ने बस्तर के स्कूलों के विज्ञान शिक्षण मॉडल की प्रशंसा की। उन्होंने बताया कि कैसे ‘हैंड्स-ऑन’ लैब कार्य और प्रोजेक्ट आधारित सीखने से छात्रों में जिज्ञासा और समस्या समाधान कौशल विकसित होता है। इस चर्चा से यह स्पष्ट हुआ कि बस्तर का अनुभव अन्य जिलों के लिए एक उदाहरण बन सकता है।
युवा वैज्ञानिकों को मिला राज्य स्तर पर मान्यता
कुल 5 बस्तर के प्रतिभागियों को राज्य स्तर पर ‘उत्कृष्ट शोधकर्ता’ के रूप में मान्यता मिली। उनमें से एक ने ‘स्मार्ट फसल निगरानी प्रणाली’ पर शोध किया, जिसे कृषि विभाग ने भी अपनाने की योजना बनाई है। इसके अलावा, 3 छात्रों को ‘उद्यमिता पुरस्कार’ मिला, जो उन्हें अपने शोध को व्यावसायिक रूप देने के लिए प्रेरित करेगा। इस मान्यता से बस्तर के अन्य छात्रों को भी विज्ञान में करियर बनाने की प्रेरणा मिली।
निष्कर्ष
बस्तर के जूनियर बाल वैज्ञानिकों का यह शानदार प्रदर्शन न केवल विज्ञान के क्षेत्र में उनकी दक्षता को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि युवा दिमागों में नवाचार की असीम संभावनाएँ हैं। राज्य स्तरीय सेमिनार में उनकी सफलता से यह स्पष्ट होता है कि यदि शिक्षा प्रणाली में प्रायोगिक सीखने को बढ़ावा दिया जाए, तो हमारे देश के भविष्य के वैज्ञानिकों को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने का अवसर मिलेगा। इस प्रकार, बस्तर की युवा वैज्ञानिकों की उपलब्धि हमें यह सिखाती है कि विज्ञान शिक्षा में निवेश, प्रेरणा और संसाधन उपलब्ध कराना, भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए अत्यावश्यक है।


