गांधी जयंती के पावन अवसर पर 2 अक्टूबर 2026 को सतरेंगा पर्यटन स्थल पर एक व्यापक स्वच्छता अभियान चलाया गया, जिसमें न केवल स्थल को साफ-सुथरा बनाया गया बल्कि पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधे भी रोपे गये। इस कार्यक्रम में स्थानीय सरकार, पर्यटन विभाग, स्कूल-शिक्षा बोर्ड और स्वयंसेवक संगठनों ने मिलकर भाग लिया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि गांधीजी के स्वच्छता और सतत विकास के विचार आज भी प्रासंगिक हैं। सतरेंगा की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित रखने के लिए यह पहल एक महत्वपूर्ण कदम माना गया।
गांधी की शिक्षाओं के साथ स्वच्छता अभियान का शुभारंभ
अभियान की शुरुआत गांधीजी के “सत्याग्रह” और “सविनय असहयोग” के सिद्धांतों को याद करते हुए की गई। स्थानीय नगर निगम के अध्यक्ष ने उद्घाटन करते हुए कहा, “गांधीजी ने हमें सिखाया कि स्वच्छता न केवल शरीर की बल्कि समाज की शुद्धि का भी प्रतीक है।” 200 से अधिक स्वयंसेवकों ने कचरा इकट्ठा करने, पथरीले हिस्सों को साफ करने और पिकनिक क्षेत्रों को व्यवस्थित करने का कार्य किया। साथ ही, पर्यटक मार्गों पर बिन और पुनर्चक्रण बिन लगाए गए ताकि भविष्य में भी कचरे का सही प्रबंधन हो सके।
पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधारोपण की सतत पहल
स्वच्छता के साथ-साथ हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिए 150 पौधों की रोपाई की गई। इन पौधों में स्थानिक वृक्षों के साथ साथ सूखा-प्रतिरोधी जड़ी-बूटियाँ भी शामिल थीं। वनस्पति विभाग के प्रमुख ने बताया, “इन पौधों से न केवल हवा की शुद्धि होगी बल्कि मिट्टी का कटाव भी रोका जा सकेगा।” रोपाई के बाद स्थानीय स्कूलों के छात्रों को पौधों की देखभाल के महत्व पर कार्यशाला दी गई, जिससे युवा पीढ़ी में पर्यावरणीय जागरूकता बढ़े।
युवाओं की सक्रिय भागीदारी और समुदाय में जागरूकता
सतरेंगा के विभिन्न स्कूलों के छात्र इस अभियान का मुख्य हिस्सा रहे। उन्होंने स्वयंसेवकों के साथ मिलकर कचरा इकट्ठा किया, पौधों की देखभाल की और पर्यटक मार्गों पर सूचना बोर्ड लगवाए। इस दौरान एक युवा ने कहा, “गांधीजी के आदर्श हमें आज भी प्रेरित करते हैं; हमें अपने वातावरण को स्वच्छ और हरित बनाना ही उनका सही उत्तर है।” इस पहल ने न केवल स्थानीय समुदाय को एकजुट किया बल्कि पर्यटन स्थल पर आने वाले आगंतुकों को भी स्वच्छता और प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूक किया।
स्थानीय समुदाय की संतुष्टि और भविष्य की योजनाएँ
अभियान के बाद स्थानीय निवासियों और पर्यटन बोर्ड ने संतुष्टि व्यक्त की। उन्होंने कहा कि “सतत स्वच्छता और हरित विकास के इस मॉडल को अन्य पर्यटन स्थलों पर भी लागू किया जाना चाहिए।” आगे चलकर सतरेंगा में हर महीने एक ‘क्लीन अप डे’ और पौधारोपण कार्यक्रम की योजना बनाई जा रही है। इसके अलावा, ‘स्वच्छता और हरित शिक्षा’ कार्यक्रम के अंतर्गत स्कूलों में नियमित कार्यशालाएँ आयोजित की जाएँगी।
निष्कर्ष
गांधी जयंती पर सतरेंगा पर्यटन स्थल में आयोजित यह स्वच्छता अभियान और पौधारोपण पहल दर्शाती है कि गांधीजी की शिक्षाएँ आज भी समाज के हर क्षेत्र में प्रासंगिक और प्रेरणादायक हैं। स्वच्छता, हरित विकास और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से न केवल स्थल की सौन्दर्य वृद्धि हुई बल्कि पर्यावरणीय चेतना भी जागृत हुई। यह कार्यक्रम भविष्य के लिए एक मिसाल बन सकता है, जहाँ हर नागरिक अपने वातावरण को स्वच्छ और हरित रखने की जिम्मेदारी को समझकर सक्रिय रूप से भाग ले।



