नई दिल्ली के होटल आईटीसी मौर्य में मंगलवार, 1 अक्टूबर 2026 को आयोजित क्रॉप केयर फेडरेशन ऑफ इंडिया की 63वीं वार्षिक आम बैठक पर केंद्रित यह लेख कृषि, किसान कल्याण और सतत विकास के बीच के महत्वपूर्ण समन्वय को उजागर करता है। इस कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर तथा पूर्व केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने उपस्थित होकर किसानों के हित में नयी नीतियों और योजनाओं पर चर्चा की। बैठक के दौरान फेडरेशन के प्रमुख कार्यों, उपलब्धियों और आगामी योजनाओं को रेखांकित करते हुए, दोनों मंत्रियों ने कृषि क्षेत्र के समक्ष आने वाली चुनौतियों और संभावनाओं पर गहन प्रकाश डाला।
किसान कल्याण के लिए नई पहल: 2026 में नई दिशा
बैठक के उद्घाटन में मंत्री रामनाथ ठाकुर ने किसानों की आय में सुधार के लिए ‘सतत कृषि और डिजिटल इंडिया’ के तहत नई पहल का अनावरण किया। उन्होंने बताया कि 2026 तक ‘किसान सहायता योजना’ के तहत 70 प्रतिशत किसानों को डिजिटल ऋण और बीमा कवरेज उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही, कृषि इनपुट्स पर कर में छूट और किसानों के लिए विशेष ऋण योजनाओं को भी विस्तृत किया गया। इन पहलों से किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार और कृषि उत्पादन में वृद्धि की उम्मीद जताई गई।
संगठन के प्रमुख उद्देश्यों पर चर्चा: किसान सहायता समीक्षा
फेडरेशन के अध्यक्ष ने बैठक में फेडरेशन के प्रमुख लक्ष्यों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि फेडरेशन का मुख्य उद्देश्य किसानों के लिए अनुकूल नीतियाँ तैयार करना, कृषि उत्पादन को बढ़ावा देना और पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखना है। बैठक में किसानों की सहायता समीक्षा के तहत, फेडरेशन ने ‘किसान सहायता समीक्षा बोर्ड’ की स्थापना का प्रस्ताव रखा, जो किसानों के मुद्दों पर त्वरित समाधान प्रदान करेगा। इसके अलावा, फेडरेशन ने ग्रामीण उद्यमिता और कृषि-आधारित उद्योगों के विकास पर भी जोर दिया।
सतत कृषि के लिए रणनीति और नीतिगत दिशानिर्देश
मंत्रियों ने सतत कृषि को बढ़ावा देने के लिए नई नीतिगत दिशानिर्देशों पर प्रकाश डाला। ‘हरित कृषि’ के तहत, फसल संरक्षण, जल संरक्षण और जैव विविधता को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके साथ ही, कृषि भूमि पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए ‘जलवायु अनुकूलन योजनाएँ’ लागू की जाएँगी। मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए ‘ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कटौती’ और ‘पुनर्योजी कृषि’ के महत्व पर बल दिया। ये नीतियाँ किसानों को जलवायु जोखिमों से बचाने और उत्पादन में स्थिरता सुनिश्चित करने में सहायक होंगी।
भविष्य की दिशा और चुनौतियों पर विचार-विमर्श: किसानों के सुरक्षा के लिए
बैठक के समापन सत्र में फेडरेशन और मंत्रियों ने भविष्य की दिशा और चुनौतियों पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि कृषि क्षेत्र को डिजिटल तकनीक, डेटा एनालिटिक्स और स्मार्ट फसल प्रबंधन की आवश्यकता है। साथ ही, किसानों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए ‘किसान सुरक्षा कोष’ की स्थापना की योजना भी प्रस्तुत की गई। मंत्री रामनाथ ठाकुर ने यह आश्वासन दिया कि सरकार किसानों के लिए ‘सुरक्षा जाल’ तैयार करेगी, जिससे वे अनिश्चित मौसम, बाज़ार उतार-चढ़ाव और अन्य जोखिमों से सुरक्षित रह सकें।
निष्कर्ष
इस वार्षिक आम बैठक ने कृषि क्षेत्र में नई ऊर्जा और आशा का संचार किया। केंद्रीय मंत्रियों की उपस्थिति और फेडरेशन की सक्रिय भूमिका से यह स्पष्ट होता है कि किसानों की भलाई और सतत विकास को आगे बढ़ाने के लिए सरकार और समाज को मिलकर काम करना आवश्यक है। भविष्य में, इन नीतियों और पहलों के सफल कार्यान्वयन से किसानों की आय में वृद्धि, कृषि उत्पादन में सुधार और पर्यावरणीय संतुलन सुनिश्चित होगा।


