कमिश्नर दिलीप कुमार ने 4 नवंबर 2026 को जारी की गई चेतावनी में कहा कि 15 साल से अधिक पुरानी वाहनों और फिटनेस प्रमाणपत्र के बिना चलने वाली स्कूल बसों पर सीधे कार्रवाई की जाएगी। इस कदम का उद्देश्य सड़क सुरक्षा बढ़ाना और बच्चों के लिए सुरक्षित परिवहन सुनिश्चित करना है।
15‑साल पुरानी गाड़ियों पर कड़ी नज़र
दिलीप कुमार ने बताया कि 2011 से पहले पंजीकृत सभी वाहनों को निरीक्षण के लिए बुलाया जाएगा। यदि वाहन का फिटनेस प्रमाणपत्र समाप्त हो चुका है या निरीक्षण के दौरान खामियां पाई गईं, तो उसे तत्काल सड़क से हटाने का आदेश दिया जाएगा।
स्कूल बसों का फिटनेस चेक अनिवार्य
स्कूल बसों के लिए विशेष रूप से फिटनेस चेक का प्रावधान किया गया है। 2024 से पहले चल रही बसों को 2026 के अंत तक फिटनेस प्रमाणपत्र प्राप्त करना अनिवार्य होगा। फिटनेस न मिलने पर बस को बंद कर दिया जाएगा और चालकों को जुर्माना लगाया जाएगा।
दंड और पुनर्वास के उपाय
उल्लंघन पर 10,000 रुपये तक का जुर्माना, वाहन पर लगे टैग को हटाना और पंजीकरण रद्द करना संभव है। साथ ही, अधिकारियों ने एक पुनर्वास कार्यक्रम शुरू किया है, जिसमें पुराने वाहनों को नवीनतम मानकों के अनुरूप बनाया जा सके।
सार्वजनिक जागरूकता और सहयोग
कमिश्नर ने नागरिकों से आग्रह किया कि वे अपने वाहनों का फिटनेस समय पर करवाएं और स्कूल बसों के फिटनेस प्रमाणपत्रों की जाँच करें। यदि कोई समस्या हो तो तुरंत नजदीकी ट्रैफ़िक पुलिस स्टेशन से संपर्क करें।
निष्कर्ष
कमिश्नर दिलीप कुमार की यह कठोर चेतावनी सड़क सुरक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। 15 साल से अधिक पुरानी गाड़ियों और फिटनेस रहित स्कूल बसों पर सख्त कार्रवाई से न केवल दुर्घटनाओं में कमी आएगी, बल्कि छात्रों के लिए भी सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित होगी। नागरिकों, स्कूल प्रशासन और परिवहन विभाग को मिलकर इस पहल को सफल बनाने की आवश्यकता है।


