आईजीएल की गैस पाइपलाइन में हुई लीक के कारण 29 सितंबर 2026 को एक विनाशकारी आग लग गई, जिसने नजदीकी आवासीय इलाकों को तहस-नहस कर दिया। लीक के तुरंत बाद गैस के दबाव में तेज़ी से वृद्धि हुई, जिससे पाइपलाइन के एक हिस्से में विस्फोट हुआ। दुर्घटना के बाद जले हुए क्षेत्र में लगभग 120 परिवारों को अपने घरों से बेघर होना पड़ा और 18 लोगों को अस्पताल पहुँचाया गया।
लीक का कारण: रख‑रखाव में कमी या तकनीकी दोष?
पुलिस के जांच दल ने बताया कि पाइपलाइन का वह हिस्सा, जहाँ से लीक हुआ, 12 वर्ष पुराना था और उसे नियमित निरीक्षण नहीं मिल रहा था। गैस कंपनी के एक वरिष्ठ इंजीनियर ने कहा कि “किसी भी समय में पाइपलाइन में सूक्ष्म दरारें हो सकती हैं, परंतु यदि नियमित रूप से निरीक्षण न हो तो यह खतरनाक स्थिति पैदा कर सकती है।”
आग की लहर: शहरी जीवन पर गहरा असर
आग के दौरान, नजदीकी स्कूल, अस्पताल और एक सरकारी कार्यालय भी जल गए। जलती हुई गैस की तेज़ गंध से बचाव दल को कई बार दोबारा रुकना पड़ा, क्योंकि गैस के धुएँ में विषाक्त पदार्थ भी थे। स्थानीय निवासियों ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए “हमारा घर जल गया, हमें कहीं शरण लेने को नहीं मिला” जैसी टिप्पणियाँ कीं।
आपातकालीन प्रतिक्रिया: क्या किया गया और क्या नहीं?
आईजीएल की आपातकालीन टीम ने तुरंत ही गैस आपूर्ति बंद कर दी, परंतु पहले से ही कई घरों में आग लग चुकी थी। फायर ब्रिगेड ने 200 से अधिक ज्वालामुखी उपकरणों के साथ आग पर नियंत्रण पाया, परंतु जलने के बाद भी 5 गैलन के अंदरूनी हिस्सों में गैस रिसाव जारी रहा। 24 घंटे के भीतर, शहर की जल आपूर्ति और बिजली लाइनों को भी पुनःस्थापित किया गया।
भविष्य में रोकथाम: नीति और निगरानी की नई दिशा
संसदीय समिति ने इस दुर्घटना के बाद “गैस पाइपलाइन निरीक्षण को अनिवार्य” बनाने का प्रस्ताव दिया है। साथ ही, “स्मार्ट सेंसर” लगाने की योजना है, जो गैस के दबाव में किसी भी बदलाव को तुरंत रिपोर्ट कर सकें। स्थानीय सरकार ने भी यह घोषणा की है कि वे अग्नि सुरक्षा के लिए नए नियम लागू करेंगे, जिनमें घरों के पास गैस लाइनों की दूरी को बढ़ाने का प्रावधान होगा।
निष्कर्ष
आईजीएल की गैस पाइपलाइन के लीक से हुई आग ने न केवल शहरी जीवन में अराजकता पैदा की, बल्कि यह एक चेतावनी भी बनी कि किसी भी अवसंरचना का रख‑रखाव नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए। भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सख्त निरीक्षण, तकनीकी उन्नति और सार्वजनिक जागरूकता अनिवार्य हो गई है। सरकार और निजी क्षेत्र को मिलकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जीवन की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम समय पर उठाए जाएँ।



