डॉ निवेदिता शर्मा , अध्यक्ष मप्र बाल अधिकार संरक्षण आयोग

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डॉ निवेदिता शर्मा , अध्यक्ष मप्र बाल अधिकार संरक्षण आयोग

डॉ. निवेदिता शर्मा ने मई 2026 में मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष के पदभार संभाला और तुरंत ही अपने कार्यकाल को एक नई दिशा दी। उनकी शिक्षा और सामाजिक कार्य के क्षेत्र में गहरी जड़ें तथा बाल संरक्षण के प्रति अटूट प्रतिबद्धता ने इस आयोग को एक सशक्त और प्रभावी संस्था के रूप में स्थापित किया है। राज्य के हर कोने में बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए उनके द्वारा शुरू की गई पहलें समाज में जागरूकता और परिवर्तन की लहर दौड़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

सशक्तिकरण का नया युग: बाल अधिकारों के लिए अग्रणी नेतृत्व

डॉ. शर्मा ने आयोग के भीतर एक समावेशी ढांचे का निर्माण किया, जिसमें सभी आयु वर्ग के बच्चों के लिए विशेष कार्यशालाएँ, प्रशिक्षण कार्यक्रम और जागरूकता अभियान चलाए गए। उन्होंने राज्य के सभी जिलों में बाल अधिकार संरक्षण केंद्र स्थापित करके बच्चों को कानूनी सहायता और मनोवैज्ञानिक समर्थन उपलब्ध कराया। इस पहल से न केवल बाल दुर्व्यवहार के मामलों में कमी आई है, बल्कि बच्चों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता भी मिली है।

सुरक्षा और शिक्षा में क्रांतिकारी बदलाव: नीतिगत पहलों का प्रभाव

उनकी अगुवाई में आयोग ने ‘सुरक्षित विद्यालय’ कार्यक्रम शुरू किया, जिससे सभी सरकारी और सरकारी सहायक विद्यालयों में निगरानी कैमरे, बाल सुरक्षा समितियाँ और आपातकालीन हेल्पलाइन स्थापित की गई। इसके अलावा, ‘शिक्षा-भोजन-स्वास्थ्य’ त्रिपक्षीय योजना के तहत स्कूलों में पौष्टिक भोजन और स्वास्थ्य जांच का समन्वय किया गया, जिससे स्कूल उपस्थिति और शैक्षणिक प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार हुआ।

सामुदायिक सहभागिता: जागरूकता और सहयोग की नई दिशा

डॉ. शर्मा ने समाज के सभी स्तरों के साथ मिलकर ‘बाल कल्याण मंच’ की शुरुआत की, जहाँ शिक्षकों, माता-पिता, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों ने मिलकर बाल संरक्षण के लिए रणनीति बनाई। इस मंच के माध्यम से स्थानीय समुदायों को बाल अधिकारों के प्रति संवेदनशील बनाया गया और स्वयंसेवी कार्यों के लिए एक सुदृढ़ नेटवर्क तैयार हुआ।

भविष्य की दृष्टि: सतत विकास और बाल कल्याण के लिए रणनीति

उनकी दीर्घकालिक योजनाओं में ‘डिजिटल बाल अधिकार पोर्टल’ का निर्माण शामिल है, जहाँ बच्चे और अभिभावक अपने अधिकारों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और शिकायत दर्ज कर सकते हैं। इसके अलावा, ‘बाल संरक्षण कोष’ के माध्यम से वित्तीय सहायता और अनुदान उपलब्ध कराए जाने की योजना है, जिससे गरीब परिवारों के बच्चे भी शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा सकें।

निष्कर्ष

डॉ. निवेदिता शर्मा का नेतृत्व मध्य प्रदेश में बाल अधिकार संरक्षण को एक नई ऊँचाई पर ले गया है। उनकी नीतिगत दूरदर्शिता, सामुदायिक सहभागिता और सतत विकास की रणनीति ने राज्य के हर कोने में बच्चों के लिए सुरक्षित, शिक्षित और सशक्त वातावरण तैयार किया है। भविष्य में भी उनके नेतृत्व में आयोग बाल कल्याण के क्षेत्र में नवाचार और सकारात्मक परिवर्तन के पथ पर अग्रसर रहेगा, जिससे मध्य प्रदेश को बाल अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में एक मिसाल के रूप में स्थापित किया जा सकेगा।