सड़क सुरक्षा पर बढ़ती चिंताएँ और दुर्घटनाओं में लगातार वृद्धि के बीच, लघु सचिवालय के सभागार में 28 सितंबर 2026 को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में सड़क सुरक्षा समिति के प्रमुख अधिकारी तथा ADC डा. सुशील कुमार ने उपस्थित होकर क्षेत्रीय सुरक्षा योजनाओं पर चर्चा की। यह कार्यक्रम स्थानीय प्रशासन के लिए एक नई दिशा तय करने का अवसर था, जिसमें दुर्घटनाओं के आँकड़ों, निवारक उपायों और जागरूकता कार्यक्रमों पर विस्तृत चर्चा हुई।
सड़क सुरक्षा पर नई दिशा: ADC डा. सुशील कुमार की पहल
बैठक के उद्घाटन में ADC डा. सुशील कुमार ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में दुर्घटनाओं में 12% की कमी आई है, परंतु अभी भी सुधार की गुंजाइश है। उन्होंने नई “सुरक्षित सड़कों” पहल के तहत शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में ट्रैफिक सिग्नल, रक्षात्मक ड्राइविंग कोर्स और सार्वजनिक जागरूकता अभियान चलाने का प्रस्ताव रखा। डा. कुमार ने कहा, “सड़क सुरक्षा केवल कानून की बात नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।”
बैठक में चर्चा: दुर्घटनाओं के आंकड़ों का विश्लेषण
समीक्षक टीम ने 2025 के आंकड़ों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया। दुर्घटनाओं का अधिकांश हिस्सा रात के समय और तेज गति से चलने के कारण हुआ। विशेष रूप से 18-35 वर्ष के युवाओं में शराब सेवन के कारण हुई दुर्घटनाओं में 9% की वृद्धि देखी गई। इस पर समिति ने रात्रि समय के लिए सड़कों पर अतिरिक्त प्रकाश व्यवस्था और शराब सेवन पर सख्त नियंत्रण के उपाय सुझाए।
रणनीतियाँ और योजनाएँ: क्षेत्रीय कार्यान्वयन के कदम
सड़क सुरक्षा समिति ने तीन प्रमुख रणनीतियाँ अपनाई: पहला, ‘सुरक्षित सड़कों’ के लिए 15 नई ट्रैफिक लाइट्स और 10 रक्षात्मक ड्राइविंग कोर्स का शुभारम्भ। दूसरा, ‘सड़क पर निगरानी’ के तहत CCTV कैमरों की स्थापना और डेटा विश्लेषण के लिए AI आधारित सॉफ्टवेयर का प्रयोग। तीसरा, ‘जागरूकता अभियान’ के तहत स्कूलों और कॉलेजों में ‘सड़क सुरक्षा दिवस’ का आयोजन।
भविष्य की चुनौतियाँ: नीति और जागरूकता का समन्वय
समिति ने यह भी रेखांकित किया कि नीतिगत बदलाव के साथ-साथ नागरिकों की जागरूकता को बढ़ाना अनिवार्य है। इसके लिए स्थानीय प्रशासन को सार्वजनिक परिवहन में सीट बेल्ट अनिवार्य करने, मोटरसाइकिल चालकों के लिए हेलमेट अनिवार्य करने और ड्राइवरों के लिए नियमित मेडिकल चेकअप कराने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
निष्कर्ष
अंत में, ADC डा. सुशील कुमार ने कहा, “सड़क सुरक्षा कोई एक बार का कार्य नहीं, बल्कि निरंतर प्रयास और समन्वय से संभव है।” इस बैठक के बाद लघु सचिवालय ने सभी विभागों के साथ मिलकर ‘सुरक्षित सड़कों’ कार्यक्रम को लागू करने का निर्णय लिया, जिससे आने वाले वर्षों में दुर्घटनाओं की संख्या में कमी और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।



