कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते असम के मुख्यमंत्री डॉ हिमंत बिस्व सरमा

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कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते असम के मुख्यमंत्री डॉ हिमंत बिस्व सरमा

असम की राजधानी डायल-डायल की गूँज में, 4 अक्टूबर 2026 को कैबिनेट बैठक के तुरंत बाद मुख्यमंत्री डॉ हिमंत बिस्व सरमा ने मीडिया को संबोधित किया। इस संबोधन ने असम के राजनीतिक परिदृश्य में एक नया अध्याय लिखा, जिसमें उन्होंने राज्य की विकास योजनाओं, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित किया। इस लेख में हम इस महत्वपूर्ण क्षण की मुख्य बातें और उसके प्रभावों का विश्लेषण करेंगे।

कैबिनेट बैठक के बाद पहला कदम: रणनीतिक नीति घोषणाएँ

बैठक के समापन के बाद, डॉ सरमा ने तुरंत एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाया। उन्होंने कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में आगामी योजनाओं का परिचय कराया। विशेष रूप से, ‘कृषि 2.0’ पहल के तहत किसानों को डिजिटल टूल्स और नई फसल किस्मों का समर्थन मिलेगा।

आर्थिक समृद्धि के लिए नए निवेश आकर्षण

मीडिया के सामने, मुख्यमंत्री ने असम में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने की योजनाओं को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) के लिए नई नीतियाँ तैयार की हैं, जिससे टेक्नोलॉजी और विनिर्माण क्षेत्र में निवेशकों को प्रोत्साहन मिलेगा।

सामाजिक समरसता और धर्मनिरपेक्षता पर जोर

सर्मा ने असम की बहु-धर्मीय परंपरा को उजागर करते हुए कहा कि सरकार सभी समुदायों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करेगी। उन्होंने धार्मिक स्थलों के संरक्षण और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए अतिरिक्त बजट की घोषणा की, जिससे सामाजिक एकता मजबूत होगी।

राष्ट्रीय एकता और सुरक्षा पर दृढ़ संकल्प

सर्वप्रथम, डॉ सरमा ने राष्ट्रीय एकता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि असम का योगदान राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता में महत्वपूर्ण होगा। इसके साथ ही, उन्होंने सीमा पर सुरक्षा बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करने के लिए नई पहल की घोषणा की।

निष्कर्ष

इस कैबिनेट बैठक के बाद के संबोधन ने असम के विकासात्मक मार्ग को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया। डॉ हिमंत बिस्व सरमा ने आर्थिक, सामाजिक और राष्ट्रीय दृष्टिकोण से राज्य की दिशा को पुनः पुष्टि की। यह संवाद असम को एक समृद्ध, समावेशी और सुरक्षित भविष्य की ओर अग्रसर करने का मार्ग प्रशस्त करता है, जिससे न केवल असम बल्कि पूरे भारत के लिए प्रेरणादायक उदाहरण स्थापित होता है।