असीमो कंपोजिट स्किल लैब का उद्घाटन 29 सितंबर 2026 को हुआ, जिसमें राज्य के उद्योग एवं कौशल विकास मंत्री ने प्रमुख भूमिका निभाई। यह लैब असीमो के मुख्यालय के पास स्थित है, जहाँ पर उन्नत कंपोजिट सामग्री पर आधारित प्रशिक्षण एवं शोध कार्य एक साथ चलेंगे। उद्घाटन समारोह में उद्योग जगत के प्रमुख नेता, शिक्षाविद और छात्र प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। यह कार्यक्रम असीमो के दीर्घकालीन लक्ष्यों के अनुरूप है, जिसमें भारत को वैश्विक कंपोजिट उद्योग में अग्रणी बनाना शामिल है।
असीमो के नवीनतम कौशल लैब का उद्घाटन: भविष्य की दिशा
लैब का उद्देश्य कंपोजिट निर्माण की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल रूप से मॉड्यूलर बनाना है। यहाँ पर 3D प्रिंटिंग, रोबोटिक असेंबली और AI आधारित गुणवत्ता नियंत्रण जैसे अत्याधुनिक उपकरण उपलब्ध हैं। इस लैब से तैयार होने वाले पेशेवरों को न केवल तकनीकी दक्षता मिलेगी, बल्कि वे वैश्विक मानकों के अनुरूप भी काम कर पाएंगे।
मंत्री के शब्द: कौशल विकास की नई शुरुआत
मंत्री ने कहा, “यह लैब हमारे युवाओं के लिए नई रोजगार संभावनाएँ खोलता है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि कंपोजिट सामग्री भारत की ऊर्जा और परिवहन उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण है। मंत्री ने लैब के साथ सरकारी और निजी क्षेत्र के बीच साझेदारी की भूमिका पर भी प्रकाश डाला, जिससे कौशल विकास को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
लैब की मुख्य विशेषताएं और तकनीकी क्षमताएं
लैब में 10 से अधिक हाई‑टेक उपकरण हैं, जिनमें स्वचालित फाइबर टेंशनिंग मशीन, रिएक्शन फ्यूज़न ओवन और इंटेग्रेटेड सिमुलेशन सॉफ्टवेयर शामिल हैं। यहाँ पर 50 घंटे का व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जाएगा, जिसमें छात्रों को वास्तविक परियोजनाओं पर काम करने का अवसर मिलेगा। इसके अलावा, लैब में एक शोध केंद्र भी स्थापित किया गया है, जो नई कंपोजिट सामग्रियों पर काम करेगा।
उद्योग और शिक्षा के बीच सेतु: लैब का महत्व
असीमो के इस पहल से उद्योग और शिक्षा के बीच की खाई को पाटने में मदद मिलेगी। विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर लैब में इंटर्नशिप और को-ऑप प्रोग्राम चलाए जाएंगे। इससे छात्रों को उद्योग के वास्तविक अनुभव के साथ-साथ अकादमिक ज्ञान भी मिलेगा। उद्योगों के लिए यह एक नया प्रतिभा पूल तैयार करेगा, जिससे नवाचार और उत्पादकता में वृद्धि होगी।
निष्कर्ष
असीमो कंपोजिट स्किल लैब का उद्घाटन एक ऐतिहासिक कदम है, जो भारत के कौशल विकास को नई दिशा देता है। मंत्री के प्रोत्साहन व लैब की अत्याधुनिक सुविधाएँ युवा पीढ़ी को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी। इस पहल से न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि भारत को कंपोजिट तकनीक में विश्व नेता बनाने की राह भी प्रशस्त होगी।



