प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवम्बर 2026 को चत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में एक अनोखी सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लिया, जहाँ सुरक्षा बलों ने “सुंदर माटी” गीत की धुन पर नृत्य किया। यह कार्यक्रम क्षेत्रीय संगीत और सुरक्षा दल के बीच समन्वय का प्रतीक बनकर सामने आया। कार्यक्रम के दौरान, भारतीय सेना, नाइट राइडर, और राज्य पुलिस के जवानों ने परंपरागत पोशाक में कदमताल करते हुए दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रधानमंत्री ने इस प्रदर्शन को सराहा और कहा कि “सुरक्षा बलों को केवल युद्ध कौशल ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक संवेदनशीलता भी होनी चाहिए।” इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल शारीरिक शक्ति से नहीं, बल्कि समाज के साथ तालमेल बिठाने से भी सुनिश्चित होती है।
सुरक्षाबलों का सांस्कृतिक नृत्य: एक नया पहल और प्रेरणा
इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण था सुरक्षा बलों का सांस्कृतिक नृत्य। सेना के जवानों ने पारंपरिक बस्तर के लोकगीत “सुंदर माटी” के साथ समकालीन डांस मूव्स का संगम प्रस्तुत किया। नृत्य में पारंपरिक हथियारों को सजावटी रूप में इस्तेमाल किया गया, जिससे दर्शकों को एक नया अनुभव मिला। इस पहल ने सुरक्षा बलों के भीतर टीमवर्क और रचनात्मकता को बढ़ावा दिया और साथ ही समाज के साथ उनके संबंधों को सुदृढ़ किया।
बस्तर की मिट्टी और संगीत की मधुरता का संगम
बस्तर की मिट्टी की गहराई और उसकी सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाने के लिए “सुंदर माटी” गीत का चयन किया गया। गीत के बोलों में क्षेत्र के प्राकृतिक सौंदर्य और परंपराओं का वर्णन है। संगीत के साथ नृत्य का संगम इस बात को उजागर करता है कि सांस्कृतिक पहचान को कैसे आधुनिक रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। यह कार्यक्रम न केवल मनोरंजन के लिए था, बल्कि बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को भी बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण कदम था।
प्रधानमंत्री ने देखी नृत्य-कलात्मक प्रस्तुति, मन में उमंग
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्यक्रम में हिस्सा लेकर सुरक्षा बलों के नृत्य को बधाई दी। उन्होंने कहा कि “सुरक्षा बलों को समाज के साथ तालमेल बिठाना चाहिए और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेना चाहिए।” उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस तरह के कार्यक्रम से युवा पीढ़ी में राष्ट्रीय गर्व और पहचान की भावना जागृत होती है। कार्यक्रम के बाद, पीएम ने सुरक्षा बलों के साथ फोटोग्राफ लिया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि वह इस पहल को कितना महत्व देते हैं।
सुरक्षा बलों की टीमवर्क और सामुदायिक जुड़ाव
इस कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा बलों ने टीमवर्क को एक नया आयाम दिया। नृत्य के दौरान हर एक सदस्य ने समन्वय और तालमेल दिखाया। इसने यह दर्शाया कि सुरक्षा बल केवल रक्षा के लिए नहीं, बल्कि समाज के साथ सामुदायिक जुड़ाव के लिए भी तैयार हैं। कार्यक्रम के बाद, कई युवा स्वयंसेवकों ने सुरक्षा बलों के साथ मिलकर बस्तर की सफ़ाई और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने का निर्णय लिया।
निष्कर्ष
बस्तर में प्रधानमंत्री के साथ “सुंदर माटी” गीत पर सुरक्षा बलों द्वारा किया गया नृत्य एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक कार्यक्रम था। इसने सुरक्षा बलों के सांस्कृतिक पहल को उजागर किया और समाज के साथ उनके गहरे संबंधों को दर्शाया। प्रधानमंत्री की उपस्थिति और प्रशंसा ने इस कार्यक्रम को और भी महत्त्वपूर्ण बना दिया। यह पहल दर्शाती है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सांस्कृतिक समृद्धि एक-दूसरे के साथ सामंजस्यपूर्ण रूप से सह-अस्तित्व में रह सकती हैं, जिससे समाज में एकता और गर्व की भावना उत्पन्न होती है।


