बैंकॉक में माइकल कुगेलमैन के साथ अयोजित एक चर्चा के दौरान वित्त मंत्री सीतारमण

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बैंकॉक में माइकल कुगेलमैन के साथ अयोजित एक चर्चा के दौरान वित्त मंत्री सीतारमण

बैंकॉक में आयोजित एक महत्वपूर्ण चर्चा के दौरान, भारत के वित्त मंत्री सीतारमण ने विश्व के प्रमुख वित्तीय विश्लेषक माइकल कुगेलमैन के साथ मिलकर वैश्विक आर्थिक परिदृश्य पर गहन संवाद किया। इस कार्यक्रम का आयोजन 16 अक्टूबर 2026 को बैंकॉक के एक प्रतिष्ठित सम्मेलन केंद्र में किया गया, जहाँ दोनों पक्षों ने भारत की आर्थिक नीतियों, निवेश आकर्षण रणनीतियों और वित्तीय स्थिरता पर विचार-विमर्श किया। इस बैठक का उद्देश्य न केवल भारत की वर्तमान आर्थिक स्थिति पर प्रकाश डालना था, बल्कि भविष्य के लिए एक स्पष्ट दिशा-निर्देश स्थापित करना भी था।

वैश्विक वित्तीय परिदृश्य में भारत की नई दिशा

इस चर्चा में सबसे पहले वैश्विक वित्तीय परिवर्तनों और उनके भारत पर प्रभाव पर चर्चा हुई। कुगेलमैन ने वैश्विक ब्याज दरों के बढ़ने, मुद्रास्फीति के दबाव और भू-राजनीतिक जोखिमों के बीच भारत के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। सीतारमण ने उत्तर देते हुए भारत की मौद्रिक नीति की लचीलापन और वित्तीय नियामक ढांचे की मजबूती पर प्रकाश डाला, जिससे निवेशकों को विश्वास मिले कि भारत आर्थिक चुनौतियों का सामना कर सकता है।

बैंकॉक में माइकल कुगेलमैन के साथ वार्ता का सार

दूसरे सत्र में कुगेलमैन ने भारत के आर्थिक सुधारों, जैसे GST, आयकर सुधार और डिजिटल इंडिया पहल पर विस्तृत टिप्पणी की। उन्होंने बताया कि कैसे ये सुधार भारत को वैश्विक निवेश मंच पर प्रतिस्पर्धी बना रहे हैं। सीतारमण ने इस पर जोर दिया कि भारत का नियामक वातावरण अब अधिक पारदर्शी और पूर्वानुमेय हो गया है, जिससे विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। दोनों ने मिलकर यह भी स्पष्ट किया कि भारत के वित्तीय क्षेत्र में नवाचार और प्रौद्योगिकी का समावेश कैसे आगे बढ़ रहा है।

वित्त मंत्री सीतारमण के प्रमुख वक्तव्य और नीतिगत संकेत

सीतारमण ने अपने भाषण में तीन प्रमुख नीतिगत संकेतों पर प्रकाश डाला: प्रथम, वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए बैंकों के पूंजी पर्याप्तता मानकों को मजबूत करना; द्वितीय, छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) के लिए ऋण सुविधा को सरल बनाना; तृतीय, सार्वजनिक क्षेत्र के निवेशों को अधिक पारदर्शी और कुशल बनाना। उन्होंने बताया कि ये कदम न केवल घरेलू अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करेंगे बल्कि अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए भी एक आकर्षक वातावरण तैयार करेंगे। कुगेलमैन ने इन नीतिगत परिवर्तनों को सकारात्मक रूप में स्वीकार किया और भारत के वित्तीय क्षेत्र में आगे की प्रगति के लिए आशावाद व्यक्त किया।

भविष्य के लिए रणनीति: निवेश आकर्षण और आर्थिक सुधार

चौथे सत्र में भविष्य की रणनीति पर चर्चा हुई। सीतारमण ने बताया कि भारत सरकार कैसे निवेश आकर्षण के लिए नए प्रोत्साहन योजनाएँ लागू कर रही है, जैसे कि नयी ऊर्जा, बुनियादी ढाँचे और डिजिटल टेक्नोलॉजी में निवेश को बढ़ावा देना। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भारत की आर्थिक सुधार योजनाएँ, जैसे कि ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘मेक इन इंडिया’, वैश्विक निवेशकों के लिए नए अवसर खोल रही हैं। कुगेलमैन ने इस पर सहमति व्यक्त करते हुए कहा कि भारत का भविष्य उज्ज्वल है, बशर्ते कि नीति निरंतरता और पारदर्शिता बनी रहे।

निष्कर्ष

बैंकॉक में यह चर्चा भारत के वित्तीय नेतृत्व को विश्व के प्रमुख आर्थिक विचारकों के साथ जोड़ने का एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई। सीतारमण के स्पष्ट नीतिगत संकेत और कुगेलमैन के सकारात्मक मूल्यांकन ने भारत की आर्थिक संभावनाओं को नई दिशा दी। भविष्य में निवेशकों के लिए यह स्पष्ट हो गया कि भारत नीतिगत स्थिरता और नवाचार के माध्यम से वैश्विक वित्तीय मंच पर अपनी प्रमुखता बनाए रखेगा।