दरभंगा:नवादा स्थित हयहट्ट देवी मंदिर में सिंहासन पूजा की अनूठी परंपरा का निर्वहन करते श्रद्धालु।

0
21
दरभंगा:नवादा स्थित हयहट्ट देवी मंदिर में सिंहासन पूजा की अनूठी परंपरा का निर्वहन करते श्रद्धालु।

दरभंगा के नवादा जिले में स्थित हेयहत देवी मंदिर, जहाँ प्राचीन काल से श्रद्धालु सिंहासन पूजा की अनूठी परंपरा को निभाते आए हैं, आज भी अपनी भव्यता और आध्यात्मिक ऊर्जा से भक्तों को आकर्षित करता है। हर वर्ष, जब पावन वसंत ऋतु की सूरतें मंदिर के परिसर में फैलती हैं, तो यहाँ की पगडंडी पर भक्ति के रंगों से भरे भक्तों के कदमों की गूँज सुनाई देती है। इस परंपरा के पीछे एक गहरी धार्मिक मान्यता और सांस्कृतिक विरासत का संगम है, जो न केवल धार्मिक उत्साह को बढ़ाता है बल्कि स्थानीय समाज के सामाजिक बंधनों को भी मजबूत करता है।

सिंहासन पूजा: देवता की राजसी शान का प्रतीक

सिंहासन पूजा में देवी के लिए एक विशेष रूप से तैयार किया गया सिंहासन रखा जाता है, जिस पर पवित्र धूप, पन्ना रंग के फूल और पंखुड़ी भरे तिलक सजते हैं। भक्तगण यहाँ पर चंदन तेल, शुद्ध धूप और सुगंधित फूलों की चढ़ाई करते हैं, जिससे देवी के राजसी रूप को मान्यता मिलती है। यह पूजा विधि देवी के प्रति श्रद्धा और आस्था का प्रतीक है, जिसे हर वर्ष मंदिर की पवित्र ध्वज के साथ मनाया जाता है।

अनूठी परंपरा का ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

हेयहत देवी मंदिर की स्थापना 18वीं शताब्दी में हुई थी, जब स्थानीय राजकुमार ने देवी के प्रति अपने श्रद्धा को दर्शाने के लिए इस मंदिर का निर्माण किया। तब से ही सिंहासन पूजा एक अनिवार्य अनुष्ठान बन गया है। इतिहास के पन्नों में यह परंपरा एक सामाजिक और सांस्कृतिक धरोहर के रूप में दर्ज है, जिसे आज भी युवा पीढ़ी द्वारा ज्यों का त्यों निभाया जाता है।

भक्तों की भागीदारी और सामुदायिक प्रभाव

मंदिर की इस अनूठी परंपरा में स्थानीय समाज के सभी वर्गों के लोग भाग लेते हैं। विशेषकर महिलाओं और बुज़ुर्गों के बीच यह पूजा एक सामाजिक एकजुटता का माध्यम बन चुकी है। हर वर्ष, जब भक्तगण सिंहासन पूजा के लिए इकट्ठा होते हैं, तो यहाँ की स्थानीय दुकानों, खानपान स्टॉल और परिवहन सेवाओं पर भी सकारात्मक आर्थिक प्रभाव पड़ता है।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों का संगम

सिंहासन पूजा के साथ-साथ यहाँ कई सांस्कृतिक कार्यक्रम, नृत्य-गीत, और लोक संगीत के प्रदर्शन भी आयोजित किए जाते हैं। इन कार्यक्रमों से न केवल भक्तगण बल्कि पर्यटक भी आकर्षित होते हैं, जिससे क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को मजबूती मिलती है।

निष्कर्ष

सिंहासन पूजा की यह अनूठी परंपरा हेयहत देवी मंदिर को केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक और सामाजिक केन्द्र बनाती है। यह परंपरा न केवल भक्तों के आध्यात्मिक जीवन को समृद्ध करती है, बल्कि स्थानीय समाज के बीच एकजुटता और सामंजस्य की भावना को भी बढ़ाती है। दरभंगा के नवादा जिले के इस पवित्र स्थल पर हर वर्ष श्रद्धालु एकत्रित होकर देवी के प्रति अपनी अनंत भक्ति और आस्था प्रकट करते हैं, जिससे यह परंपरा भविष्य की पीढ़ियों तक जीवित रहेगी।