कांग्रेस के कुछ पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता 22 अक्टूबर 2026 को एसडीएम कार्यालय के सामने मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला जला कर अपनी असंतुष्टि व्यक्त कर रहे हैं। यह घटना उत्तर प्रदेश के किसी जिले में हुई, जहाँ चुनाव आयोग की नीतियों और कार्यों पर लगातार विवाद चल रहे हैं। पुतले को जलाने के बाद भीड़ ने ताली बजाई और कुछ ने नारे लगाते हुए अपनी असहमति जताई। इस कदम को कुछ ने राजनीतिक प्रदर्शन के रूप में देखा, जबकि अन्य ने इसे अवैध आचरण के रूप में निंदा की।
कांग्रेस के पदाधिकारी पुतले को जलाने का कारण
कांग्रेस के अनुसार, पुतले को जलाने का मुख्य कारण चुनाव आयोग के निर्णयों से असंतोष है। पार्टी के वरिष्ठ नेता ने कहा, “चुनाव आयोग ने कई बार अनियमितताओं को नज़रअंदाज़ किया है और हमें लगता है कि इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि पुतला जलाना “एक प्रतीकात्मक कार्य” है, जिसका उद्देश्य जनता को चुनावी प्रक्रियाओं में सुधार के लिए जागरूक करना है।
एसडीएम कार्यालय के सामने पुतले की दहन प्रक्रिया
पुतले को जलाने के लिए सबसे पहले एक छोटी भीड़ इकट्ठा हुई। पुतले के ऊपर एक मशाल रखी गई, और फिर उसे प्रज्वलित किया गया। आग को नियंत्रित करने के लिए कुछ पुलिस कर्मियों ने तुरंत आग बुझाने की कोशिश की, परंतु पुतले की आग जल्दी फैल गई। घटना के दौरान कोई घायल नहीं हुआ, परंतु पुतले के जलने के बाद भीड़ ने नारे लगाना जारी रखा। पुलिस ने घटना के बाद भीड़ को अलग किया और उन्हें सुरक्षित दूरी पर ले गया।
मुख्य चुनाव आयुक्त पर संभावित कानूनी कार्रवाई संबंधित
कांग्रेस के इस कार्य के जवाब में चुनाव आयोग ने कहा कि “ऐसे किसी भी आचरण को अवैध माना जाएगा और संबंधित व्यक्तियों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।” आयोग ने चेतावनी दी कि पुतले को जलाना “किसी भी सार्वजनिक पदाधिकारी के प्रति अपमानजनक व्यवहार” के रूप में देखा जा सकता है। यदि पुतले को जलाने वाले व्यक्तियों की पहचान हो जाती है, तो उन पर “अपमानजनक कृत्य” के तहत दंडात्मक कार्रवाई हो सकती है।
प्रतिक्रिया: कांग्रेस और विपक्ष की स्थिति पर प्रभाव
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने इस कदम को “एक साहसिक राजनीतिक कदम” बताया और कहा कि यह चुनाव आयोग के कार्यों पर दबाव बनाए रखने का माध्यम है। विपक्षी दलों ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि “अश्लील प्रतीकात्मक कार्यों से राजनीतिक माहौल और भी खराब होगा।” कुछ नागरिक समाज के कार्यकर्ताओं ने भी इस कदम की आलोचना की और कहा कि “सार्वजनिक पदाधिकारियों के प्रति सम्मान और शिष्टाचार बनाए रखना ज़रूरी है।”
निष्कर्ष
इस पुतले को जलाने की घटना ने चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों के बीच तनाव को फिर से उजागर किया है। जबकि कांग्रेस के पदाधिकारियों का मानना है कि यह प्रतीकात्मक कार्य उनके असंतोष को दर्शाता है, चुनाव आयोग और अन्य राजनीतिक समूहों का कहना है कि ऐसे कदम अवैध और अस्वीकार्य हैं। यदि कानूनी कार्रवाई की जाती है, तो यह घटना चुनावी प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही पर चर्चा को और गहरा कर सकती है।


