कोरबा के सर्वमंगला मंदिर में शारदीय नवरात्रि की धूम, 12,106 ज्योति कलश प्रज्वलित; विदेशों से भी पहुंची आस्था की ज्योति

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कोरबा के सर्वमंगला मंदिर में शारदीय नवरात्रि की धूम, 12,106 ज्योति कलश प्रज्वलित; विदेशों से भी पहुंची आस्था की ज्योति

कोरबा के सर्वमंगला मंदिर में शारदीय नवरात्रि की धूम ने इस वर्ष के त्योहार को एक अनोखे रंग में रंग दिया। हजारों श्रद्धालु एकत्रित हुए, जहाँ परंपरा और आधुनिकता का संगम देखने को मिला। इस विशेष अवसर पर 12,106 ज्योति कलशों को प्रज्वलित किया गया, जिससे मंदिर की दीवारें और परिसर एक सजीव प्रकाशमय दृश्य में बदल गया। साथ ही, विदेशों से भी आस्था की रोशनी ने इस पवित्र स्थल को रोशन किया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि धर्म की सीमाएँ भौगोलिक सीमाओं से परे हैं।

सर्वमंगला मंदिर में नवरात्रि का भव्य आयोजन उत्सव

नवरात्रि के नौवें दिन, सर्वमंगला मंदिर में एक भव्य आयोजन हुआ, जिसमें देवी सर्वमंगला की आरती और भजन-कीर्तन को श्रद्धालुओं के साथ मिलकर मनाया गया। स्थानीय कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य और संगीत का प्रदर्शन किया, जिससे माहौल और भी रंगीन हो गया। गाँव के युवाओं ने स्वयंसेवा के रूप में मंदिर की सफाई और सजावट का कार्य किया, जिससे सामुदायिक भावना को बढ़ावा मिला।

12,106 ज्योति कलशों की रौशनी ने बनाया जादुई माहौल

मंदिर के प्रांगण में रखे गए 12,106 कलशों को एक-एक कर प्रज्वलित किया गया, जिससे एक जादुई प्रकाश की धारा बन गई। प्रत्येक कलश में जले हुए तेल और दीपक की रोशनी ने रात को एक दिव्य रूप दिया। इस रौशनी के बीच, श्रद्धालुओं ने पवित्र जल से स्नान किया और अपने मन को शुद्ध किया। यह दृश्य इतना प्रभावी था कि कई वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं।

विदेशी भक्तों ने भी दीर्घकालिक आस्था का प्रदर्शन

इस वर्ष, कोरबा के सर्वमंगला मंदिर में कई भारतीय प्रवासी भी आए। वे भारत से दूर रहते हुए भी अपने धर्म की जड़ें ताज़ा रखने के लिए इस शारदीय नवरात्रि में भाग लेने आए। उनके द्वारा लाई गई प्रार्थना पुस्तिकाएँ और भक्ति गीत ने मंदिर की सांस्कृतिक विविधता को और भी समृद्ध किया। कुछ प्रवासी परिवारों ने अपने बच्चों के लिए विशेष पूजा की व्यवस्था भी की, जिससे परंपरा का संरक्षण सुनिश्चित हुआ।

रिवाजों और परम्पराओं के संग समृद्ध सांस्कृतिक अनुभव

मंदिर के भीतर आयोजित विविध रिवाजों और परम्पराओं ने श्रद्धालुओं को एक समृद्ध सांस्कृतिक अनुभव प्रदान किया। यहाँ पर शारदीय नवरात्रि के दौरान विशेष रूप से ‘ज्योति कलश’ की पूजा, ‘भैरव पूजा’ और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का पाठ किया गया। साथ ही, स्थानीय शिल्पकारों द्वारा हस्तनिर्मित फूलों के हार और पंखुड़ी के दीपक भी प्रदर्शित किये गये।

निष्कर्ष

सर्वमंगला मंदिर में शारदीय नवरात्रि के दौरान 12,106 ज्योति कलशों की रोशनी और विदेशों से आए भक्तों की आस्था ने इस पवित्र स्थल को एक नया आयाम दिया। यह आयोजन न केवल धार्मिक परम्पराओं की निरंतरता को दर्शाता है, बल्कि सांस्कृतिक एकता और अंतरराष्ट्रीय भक्ति के प्रतीक के रूप में भी उभरता है। कोरबा के इस मंदिर की यह धूम आने वाले वर्षों में भी श्रद्धालुओं के दिलों में एक अमिट छाप छोड़ती रहेगी।