पत्रकार लुत्फुज्जमान अलीफ फकीर । फोटो – ढाका ट्रिब्यून

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पत्रकार लुत्फुज्जमान अलीफ फकीर । फोटो - ढाका ट्रिब्यून

पत्रकार लुत्फुज्जमान अलीफ फकीर, जिनकी कहानी आज भी प्रेरणा का स्रोत है, 16 अक्टूबर 2026 को शांति से विदा हो गये। ढाका ट्रिब्यून की पन्नों पर उनके योगदान और संघर्षों को समर्पित यह लेख उनके जीवन की एक संक्षिप्त परंतु गहरी झलक पेश करता है।

प्रारम्भिक जीवन और शिक्षा: बचपन से सपनों की ओर पहला कदम

लुत्फुज्जमान का जन्म 12 मार्च 1945 को ढाका के एक साधारण परिवार में हुआ। बचपन से ही उन्होंने पढ़ाई और जिज्ञासा के प्रति गहरी लगन दिखाई। 1960 के दशक में उन्होंने ढाका विश्वविद्यालय से अंग्रेज़ी साहित्य में स्नातक की डिग्री प्राप्त की, जिसके बाद उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखा।

पत्रकारिता की शुरुआत: समाचार पत्रों से डिजिटल युग तक

उनका पत्रकारिता करियर 1970 के दशक में शुरू हुआ, जब वे ‘दैनिक प्रगतिशील’ के लिए लेख लिखते थे। उनकी लेखनी ने शीघ्र ही पाठकों का दिल जीत लिया। 1980 के दशक में उन्होंने ‘सत्यवाणी’ और ‘समीक्षा’ जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में योगदान दिया। 2000 के बाद डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के उदय के साथ उन्होंने ऑनलाइन समाचार पोर्टल्स पर भी सक्रिय रूप से काम किया, जिससे उनकी पहुँच और भी व्यापक हुई।

सामाजिक कार्य और आवाज़: समाज को बदलने के लिए संघर्ष

लुत्फुज्जमान केवल समाचार लिखने तक सीमित नहीं थे। वे मानवाधिकार, शिक्षा और महिलाओं के अधिकारों के लिए अथक संघर्ष करते रहे। 1990 के दशक में उन्होंने ‘समीक्षा’ के माध्यम से बाल श्रम के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाया। 2005 में उन्होंने एक गैर‑सरकारी संस्था की स्थापना की, जो ग्रामीण क्षेत्रों में साक्षरता कार्यक्रम चलाती है।

विरासत और यादें: आज भी जीवित प्रेरणा

उनकी लेखनी में सत्य की अनोखी खोज और सामाजिक न्याय की गहरी समझ देखने को मिलती है। ‘सत्यवाणी’ के एक लेख में उन्होंने कहा, “सच्ची पत्रकारिता वह है, जो समाज को बदलने के लिये साहसिक कदम उठाती है।” यह कथन आज भी युवा पत्रकारों के लिए प्रेरणा स्रोत है।

निष्कर्ष

लुत्फुज्जमान अलीफ फकीर की मृत्यु ने पत्रकारिता और समाज दोनों के लिए एक गहरी खामी छोड़ दी है। परंतु उनकी लेखनी, उनके कार्य और उनके आदर्श आज भी युवा पीढ़ी को सत्य, न्याय और समाज के प्रति ज़िम्मेदारी की भावना से प्रेरित करते हैं। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि पत्रकारिता केवल सूचना देने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जागरूक और सशक्त बनाने का एक शक्तिशाली साधन है। उनके योगदान के बिना आज की पत्रकारिता की कहानी अधूरी रह जाती। उनकी यादें हमें हमेशा प्रेरित करती रहेंगी।