महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘दीर्घायु 2026’ के दूसरे दिन वृद्धावस्था से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं एवं उनके उपचार पर व्याख्यान देते देशभर से आए विशेषज्ञ चिकित्सक।

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महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘दीर्घायु 2026’ के दूसरे दिन वृद्धावस्था से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं एवं उनके उपचार पर व्याख्यान देते देशभर से आए विशेषज्ञ चिकित्सक।

महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय में 5 नवंबर 2026 को आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘दीर्घायु 2026’ के दूसरे दिन, देशभर से आए विशेषज्ञ चिकित्सकों ने वृद्धावस्था से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं और उनके उपचार पर गहन व्याख्यान दिए। इस कार्यक्रम का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों के जीवन‑मान को बेहतर बनाना और स्वास्थ्य सेवाओं में नवीनतम प्रगति को साझा करना था।

वृद्धावस्था की जटिल स्वास्थ्य चुनौतियाँ और समाधान साथ

सत्र की शुरुआत में डॉ. रश्मि पाटिल, न्यूरोलॉजी की प्रमुख, ने वृद्धावस्था में न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के बढ़ते जोखिम पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि स्मृति क्षय, डिमेंशिया और पार्किंसन रोगों के लक्षणों को प्रारम्भिक पहचान और दवाइयों के संयोजन से धीमा किया जा सकता है। साथ ही, हृदय‑वहिकीय रोगों के लिए जीवन‑शैली में बदलाव—जैसे संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और धूम्रपान पर नियंत्रण—के महत्व पर बल दिया।

विशेषज्ञ चिकित्सकों के नवीनतम शोध और प्रगति रोगों

संगोष्ठी के दौरान, डॉ. अजय सिंह, ऑन्कोलॉजी के प्रमुख, ने वृद्धावस्था में कैंसर के उपचार में इम्यूनोथेरेपी की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि ट्यूमर‑विशिष्ट टी‑सेल्स का उपयोग करके दुष्ट कोशिकाओं को लक्षित करने वाली नई दवाओं से रोगियों की जीवित रहने की दर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इसके अलावा, डॉ. नेत्रशल्य चिकित्सक डॉ. सुमन लाल ने वृद्धावस्था में नेत्र रोगों के लिए रोबोटिक सर्जरी के उपयोग पर प्रकाश डाला, जिससे सटीकता और रिकवरी समय दोनों में सुधार हुआ।

रोगियों और परिवारों के लिए व्यावहारिक मार्गदर्शिका कदम

सत्र के बाद, एक पैनल चर्चा में डॉ. प्रिया मेहता, पब्लिक हेल्थ विशेषज्ञ, ने रोगियों और उनके परिवारों के लिए व्यावहारिक कदम सुझाए। इनमें नियमित स्वास्थ्य जांच, दवाओं का समय‑सारणी पालन, और मानसिक स्वास्थ्य के लिए सामाजिक गतिविधियों में भागीदारी शामिल थे। उन्होंने वृद्धावस्था में डिप्रेशन और अकेलेपन को कम करने के लिए सामुदायिक समर्थन समूहों के महत्व पर भी जोर दिया।

समावेशी नीति और समाजिक समर्थन का महत्व सफलता

संगोष्ठी के समापन पर, विश्वविद्यालय के निदेशक प्रो. मनोहर शुक्ल ने बताया कि सरकारी स्वास्थ्य नीतियों में वृद्धावस्था के लिए विशेष प्रावधान जोड़ने से न केवल रोगों की रोकथाम संभव है, बल्कि समाजिक कल्याण भी बढ़ता है। उन्होंने कहा, “समावेशी नीति और समाजिक समर्थन के बिना, किसी भी चिकित्सा प्रगति का पूर्ण लाभ नहीं उठाया जा सकता।”

निष्कर्ष

‘दीर्घायु 2026’ के दूसरे दिन के कार्यक्रम ने वृद्धावस्था से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं पर गहन दृष्टिकोण और नवीनतम उपचार विकल्पों को उजागर किया। विशेषज्ञों के अनुभव और शोध ने यह स्पष्ट किया कि समय‑पूर्व पहचान, समग्र देखभाल और समावेशी नीतियाँ ही वृद्ध नागरिकों के लिए बेहतर जीवन‑मान सुनिश्चित कर सकती हैं। इस संगोष्ठी से प्राप्त ज्ञान और सुझावों को लागू करके, हम एक स्वस्थ, सशक्त और खुशहाल वृद्ध समाज की ओर अग्रसर हो सकते हैं।