गोरखपुर में रविवार को वरिष्ठ कवयित्री डॉ. प्रतिभा गुप्ता के काव्य संग्रह ‘यादों को फिर से मुस्कुराने दो’ का लोकार्पण करते पद्मश्री प्रो. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, प्रो. सुरेन्द्र दुबे, प्रो. अनिल राय एवं अन्य अतिथिगण।

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गोरखपुर में रविवार को वरिष्ठ कवयित्री डॉ. प्रतिभा गुप्ता के काव्य संग्रह ‘यादों को फिर से मुस्कुराने दो’ का लोकार्पण करते पद्मश्री प्रो. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, प्रो. सुरेन्द्र दुबे, प्रो. अनिल राय एवं अन्य अतिथिगण।

गोरखपुर के सांस्कृतिक मंच पर इस रविवार एक विशेष कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ कवयित्री डॉ. प्रतिभा गुप्ता के नवीनतम काव्य संग्रह “यादों को फिर से मुस्कुराने दो” का लोकार्पण हुआ। यह कार्यक्रम शहर की साहित्यिक परंपरा को नयी दिशा देने वाला एक महत्वपूर्ण कदम था। स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर के कई कलाकार, लेखक और साहित्यिक प्रतिष्ठित व्यक्तित्व इस कार्यक्रम के लिए उपस्थित रहे, जिससे यह एक यादगार सांस्कृतिक मिलन स्थल बन गया।

काव्य के पन्नों में यादों की नई रोशनी

डॉ. प्रतिभा गुप्ता की इस नई रचना में समय के साथ बदलती भावनाओं के जटिल ताने-बाने को सूक्ष्मता से बयां किया गया है। कविताएँ यादों के अंशों को फिर से जीवंत करती हैं, जिससे पाठकों को अपने अतीत के साथ एक सच्चा संवाद स्थापित करने का अनुभव मिलता है। संग्रह में शुद्ध भावनात्मक भाषा और गहरी दार्शनिक सोच का संगम है, जो पाठकों को आत्म-चिंतन के लिए प्रेरित करता है।

पद्मश्री प्रो. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी की प्रेरणादायक भूमिका

पद्मश्री प्रोफेसर विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने लोकार्पण समारोह की अध्यक्षता करते हुए साहित्य के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा और समर्पण का परिचय दिया। उन्होंने डॉ. प्रतिभा गुप्ता की काव्य यात्रा की प्रशंसा करते हुए बताया कि कैसे उनकी कविताएँ समाज के विभिन्न वर्गों के बीच सहानुभूति और समझ बढ़ाती हैं। तिवारी के प्रेरणादायक शब्दों ने कार्यक्रम को एक ज्ञानवर्धक और उत्साहपूर्ण माहौल दिया।

महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव का स्वागत भाषण

गोरखपुर के महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने कार्यक्रम में स्वागत भाषण देते हुए शहर की सांस्कृतिक परंपरा के संरक्षण और विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि साहित्य और कविता समाज के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और गोरखपुर को इस क्षेत्र में और भी समृद्ध बनाने के लिए स्थानीय कलाकारों के साथ मिलकर काम करेंगे।

साहित्यिक दिग्गजों की भागीदारी और भविष्य की दिशा

साहित्यिक दिग्गज प्रो. सुरेन्द्र दुबे और प्रो. अनिल राय ने भी कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। दोनों ने डॉ. प्रतिभा गुप्ता के कार्य की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस संग्रह से आने वाली पीढ़ियाँ भी प्रेरित होंगी। उन्होंने गोरखपुर में साहित्यिक कार्यक्रमों के लिए नई पहलें और कार्यशालाओं की योजना पर चर्चा की, जिससे युवा लेखकों को मंच मिलेगा।

निष्कर्ष

गोरखपुर में हुआ यह लोकार्पण कार्यक्रम न केवल डॉ. प्रतिभा गुप्ता के नवीनतम काव्य संग्रह की सफलता को दर्शाता है, बल्कि शहर की सांस्कृतिक पहचान को भी समृद्ध करता है। साहित्य, कला और समाज के बीच समृद्ध संवाद को आगे बढ़ाने के लिए यह पहल एक नई दिशा तय करती है।