मृतक परविंदर सिंह झोटा।

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मृतक परविंदर सिंह झोटा।

परविंदर सिंह झोटा का निधन 21 अक्टूबर 2026 को हुआ, जिससे उनके परिवार, सहकर्मियों और समाज के कई लोगों को गहरा आघात पहुँचा। वह एक समर्पित सार्वजनिक सेवक थे, जिन्होंने अपने जीवन के अधिकांश समय ग्रामीण विकास, शिक्षा और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में कार्य किया। उनकी मृत्यु ने न केवल एक प्रतिष्ठित नेता को खो दिया, बल्कि एक प्रेरणा को भी, जो आज भी लोगों के दिलों में जीवित है। इस लेख में हम उनके जीवन की मुख्य उपलब्धियों, समाज पर उनके प्रभाव और उनके परिवार के अनुभवों पर प्रकाश डालेंगे।

जीवन का सारांश और प्रारंभिक वर्ष

परविंदर सिंह झोटा का जन्म 1948 में सिमरनपुर के एक छोटे से गाँव में हुआ। बचपन से ही उन्होंने शिक्षा के प्रति गहरी लगन दिखाई और स्थानीय स्कूल में उत्कृष्ट अंक प्राप्त किए। 1970 के दशक में उन्होंने अपनी शिक्षा के लिए पंजाब विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र में स्नातक की डिग्री हासिल की। विश्वविद्यालय के दौरान ही उन्होंने ग्रामीण समाज के समस्याओं को समझा और उन्हें हल करने के लिए सक्रिय कदम उठाने का संकल्प लिया।

समाज में योगदान और कार्य

स्नातक होने के बाद परविंदर ने अपने गाँव में स्वच्छता और स्वास्थ्य कार्यक्रम शुरू किये। 1980 के दशक में उन्होंने एक स्वैच्छिक संस्था की स्थापना की, जिसने ग्रामीण महिलाओं के लिए कौशल प्रशिक्षण और सूक्ष्म ऋण योजनाएँ उपलब्ध कराईं। इसके अलावा, उन्होंने 1995 में एक ग्रामीण विकास समिति के प्रमुख के रूप में कार्य किया, जहाँ उन्होंने प्यास के पानी की व्यवस्था, सड़क निर्माण और शिक्षा के लिए स्कूलों की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके प्रयासों से सिमरनपुर के 70% परिवार अब स्वच्छ पानी और बिजली से सुसज्जित हैं।

परिवार और सहकर्मी की भावनाएँ

परविंदर के परिवार ने उनके निधन पर गहरी शोक व्यक्त की। उनके पुत्र ने कहा, “पिता हमेशा अपने गाँव के लिए समर्पित रहे। उनकी यादें हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देंगी।” सहकर्मियों ने भी उनके योगदान की प्रशंसा करते हुए कहा, “उनकी निष्ठा और नेतृत्व से हम सब सीखते हैं कि कैसे समाज को बेहतर बनाया जा सकता है।” उनके दोस्तों ने उनकी दयालुता और उदारता को याद किया, जो हमेशा ज़रूरतमंदों की मदद करते थे।

भविष्य के लिए प्रेरणा और विरासत

परविंदर सिंह झोटा की विरासत आज भी युवा पीढ़ी को प्रेरित करती है। उनके द्वारा स्थापित ‘सिमरनपुर विकास फाउंडेशन’ अब भी ग्रामीण शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्यरत है। उनके जीवन के उदाहरण से यह स्पष्ट होता है कि एक व्यक्ति भी समाज में परिवर्तन ला सकता है। युवा नेता और स्वयंसेवक उनके आदर्शों को अपनाते हुए नई पहलें शुरू कर रहे हैं, जैसे कि डिजिटल शिक्षा कार्यक्रम और महिला सशक्तिकरण अभियान।

निष्कर्ष

परविंदर सिंह झोटा की मृत्यु ने एक महान नेता को खो दिया, परंतु उनकी यादें और कार्य हमें यह सिखाती हैं कि समर्पण और सेवा से समाज में स्थायी परिवर्तन संभव है। उनके योगदान ने सिमरनपुर और आसपास के क्षेत्रों के लोगों के जीवन को बेहतर बनाया, और उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। उनके परिवार, सहकर्मियों और समाज के सभी वर्गों की ओर से हम उनकी यादों को सदा स्मरण करेंगे और उनके कार्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लेते हैं।