जांच करने अस्पताल पहुंची पुलिस टीम

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जांच करने अस्पताल पहुंची पुलिस टीम

परिवार के सदस्यों और अस्पताल के कर्मचारियों के बीच तनाव बढ़ते हुए, 14 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:30 बजे, नयी दिल्ली के सेंट जॉन अस्पताल में एक रहस्यमय मृत्यु के बाद पुलिस टीम को त्वरित रूप से बुलाया गया। 55 वर्षीय रोगी, श्रीमती अंजलि शर्मा, जो कि उच्च रक्तचाप और मधुमेह से पीड़ित थीं, को ऑपरेशन थिएटर में शल्यक्रिया के दौरान अचानक बेहोश कर दिया गया और बाद में उन्हें अस्पताल के आपातकालीन कक्ष में मृत पाया गया। अस्पताल प्रबंधन ने यह दावा किया कि यह एक आकस्मिक दुर्घटना थी, जबकि परिवार ने डॉक्टरों पर अनैतिक व्यवहार का आरोप लगाया। इस विवाद को सुलझाने के लिए पुलिस टीम को मौके पर भेजा गया।

पुलिस टीम का त्वरित आगमन: अस्पताल में जांच शुरू

पुलिस की टीम को अस्पताल के प्रबंधन द्वारा 10:45 बजे पर बुलाया गया। मौके पर पहुंचते ही, पुलिस ने एक साक्ष्य संरक्षण इकाई स्थापित की और ऑपरेशन थिएटर तथा आपातकालीन कक्ष के सभी दस्तावेज़ों को सील कर दिया। जांचकर्ता ने बताया कि वे रोगी की मृत्यु के कारणों को स्पष्ट करने के लिए फोरेंसिक विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम करेंगे। अस्पताल के प्रमुख डॉक्टर, डॉ. राकेश कुमार, ने पुलिस को बताया कि शल्यक्रिया के दौरान रोगी को एनेस्थीसिया दिया गया था, परंतु किसी भी दवा की मात्रा में कोई असामान्यता नहीं पाई गई।

मृतक रोगी के परिवार की दावे: डॉक्टरों पर संदेह

रोगी के परिवार ने पुलिस से यह मांग की कि डॉक्टरों के खिलाफ औपचारिक जांच हो। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर ने रोगी को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं दी और दवा का गलत डोज दिया। परिवार के मुखिया ने पुलिस से यह भी कहा कि अस्पताल की सुरक्षा कैमरों में ऑपरेशन थिएटर के अंदर और बाहर की तस्वीरें दिख रही हैं, जिनमें डॉक्टर को रोगी के साथ असामान्य बातचीत करते हुए देखा गया। पुलिस ने इन दावों को स्वीकार किया और जाँच के दौरान वीडियो फुटेज को भी जांच के दायरे में लिया।

साक्ष्य और फोरेंसिक रिपोर्ट: दवा के दुष्प्रभाव का संदेह

फोरेंसिक टीम ने रोगी के रक्त और ऊतकों का परीक्षण किया। प्रारंभिक रिपोर्ट में यह पाया गया कि रोगी के रक्त में एनेस्थेटिक दवा की मात्रा सामान्य से अधिक थी। इसके अलावा, दवा के दुष्प्रभाव के कारण रोगी की हृदय गति अचानक गिर गई हो सकती है। पुलिस ने इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए, दवा के आपूर्तिकर्ता के साथ भी पूछताछ की। दवा निर्माता ने पुष्टि की कि उस दिन की आपूर्ति में कोई त्रुटि नहीं थी, परंतु वे फोरेंसिक रिपोर्ट के पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं।

अभियोजन की तैयारी: अस्पताल प्रशासन पर दबाव बढ़ता

अस्पताल प्रशासन को अब न केवल चिकित्सा त्रुटि के लिए बल्कि संभावित चिकित्सा कदाचार के लिए भी जांच का सामना करना पड़ेगा। अस्पताल के निदेशक ने पुलिस से कहा कि वे सभी चिकित्सा रिकॉर्ड और कर्मचारी पंजीकरण को खुला रखेंगे। पुलिस ने यह भी कहा कि यदि कोई अनियमितता पाई जाती है तो अस्पताल के प्रमुख और संबंधित डॉक्टरों पर आपराधिक मुकदमा चलाया जा सकता है। परिवार के प्रतिनिधियों ने पुलिस से यह भी आग्रह किया कि वे किसी भी तरह की दवाओं की जांच करें जो रोगी को दी गई थीं।

निष्कर्ष

इस रहस्यमय मृत्यु के बाद नयी दिल्ली के सेंट जॉन अस्पताल में पुलिस की जाँच चल रही है। फोरेंसिक रिपोर्ट के पूरा होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि क्या यह एक दुर्घटना थी या चिकित्सा कदाचार। पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया और अस्पताल के अधिकारियों की सहयोगी कार्रवाई से उम्मीद है कि सत्य जल्द ही सामने आएगा और न्याय सुनिश्चित होगा।