माता अन्नपूर्णेश्वरी की स्वर्णमयी प्रतिमा को 6 नवंबर 2026 को नई दिल्ली के राजपथ पर स्थित विश्व प्रसिद्ध अन्नपूर्णा मंदिर में अनावरण किया गया। इस अनूठी प्रतिमा को बनाने में सोने की 12 किलोग्राम की पन्नी तथा 10 किलोग्राम की चांदी का उपयोग किया गया, जो इसे विश्व की सबसे महँगी और भव्य धार्मिक प्रतिमा बनाता है। अनावरण के दौरान उपाध्याय पंडित रवि सिंहजी ने कहा कि यह प्रतिमा न केवल धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि यह भारतीय कला और शिल्प कौशल का प्रतीक भी है।
अन्नपूर्णा मंदिर में स्वर्ण प्रतिमा का अनावरण: एक ऐतिहासिक पल
सुवर्ण प्रतिमा के अनावरण समारोह में राजकुमारी रानी शारदा, पंडित रवि सिंहजी, और अन्य प्रमुख धार्मिक नेता उपस्थित थे। समारोह में धूमधाम से धूम्रपान, दीप जलाना और भजन-संगीत की ध्वनि ने वातावरण को पवित्र बना दिया। प्रतिमा के अनावरण के बाद, उपाध्याय पंडित रवि सिंहजी ने प्रतिमा पर चढ़ी हुई चांदी की पन्नी को आशीर्वाद दिया और कहा कि यह प्रतिमा सभी धर्मों के अनुयायियों के लिए एकता का प्रतीक है।
सोने की शिल्पकारी: भारतीय शिल्पकारों का कौशल
प्रतिमा को बनाने के लिए 200 से अधिक कुशल शिल्पकारों ने काम किया, जिनमें से 30 शिल्पकारों ने सोने की पन्नी को 0.01 मिलीमीटर तक की सटीकता से ढाला। इस शिल्पकारी में प्राचीन भारतीय तकनीक और आधुनिक मशीनरी का संयोजन किया गया, जिससे प्रतिमा की नाजुक रेखाएं और जटिल डिज़ाइन स्पष्ट रूप से उभरे। शिल्पकारों ने कहा कि उन्होंने प्रतिमा के हर हिस्से में माता अन्नपूर्णा की भक्ति और अनुग्रह की भावना को समाहित किया है।
श्रद्धालुओं की भीड़: अनंत भक्ति और आस्था
अनावरण के बाद मंदिर के द्वार पर हजारों श्रद्धालु उमड़ पड़े। उन्होंने प्रतिमा के सामने प्रार्थना की, आशीर्वाद मांगा और अपने परिवार के लिए समृद्धि की कामना की। सोशल मीडिया पर #स्वर्णमयीअन्नपूर्णा हैशटैग के साथ लाखों तस्वीरें और वीडियो शेयर हुए। भक्तों ने कहा कि प्रतिमा के सामने आने से उन्हें शांति और संतोष की अनुभूति हुई।
भविष्य की योजनाएँ: अनुष्ठान और कार्यक्रम
मंदिर प्रशासन ने घोषणा की कि अगले महीने से प्रतिमा के चारों ओर एक विशेष अनुष्ठान कार्यक्रम चलाया जाएगा, जिसमें हर दिन सुबह 5 बजे से 7 बजे तक धूप और दीप जलाया जाएगा। साथ ही, अन्नपूर्णा मंदिर में एक नया सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा, जिसमें पारंपरिक नृत्य, संगीत और भजन का प्रदर्शन होगा।
निष्कर्ष
माता अन्नपूर्णेश्वरी की स्वर्णमयी प्रतिमा का अनावरण भारतीय शिल्पकला, धार्मिक भक्ति और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। यह प्रतिमा न केवल भक्तों के लिए एक आध्यात्मिक अनुभव लेकर आती है, बल्कि यह भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और शिल्प कौशल को विश्व के सामने गर्व से प्रस्तुत करती है। इस अनूठी प्रतिमा से आने वाले वर्ष में अन्नपूर्णा मंदिर एक और भी अधिक धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र बनकर उभरने की संभावना है।


