मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को दीवान बाजार स्थित आवास पर पहुँचकर, दिवंगत वरिष्ठ होम्योपैथ चिकित्सक डॉ. रामरतन बनर्जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। यह भावुक यात्रा डॉ. बनर्जी के परिवार और उनके मरीजों के लिए एक सांत्वनादायक क्षण थी। डॉ. बनर्जी, जिनका निधन 28 अक्टूबर 2026 को हुआ, ने अपनी आयु 78 वर्ष में होम्योपैथी के क्षेत्र में कई नवाचार और योगदान किए थे। मुख्यमंत्री की इस श्रद्धांजलि ने न केवल परिवार को सान्त्वना पहुंचाई, बल्कि समाज में होम्योपैथी के महत्व को भी पुनः उजागर किया।
डॉ. रामरतन बनर्जी: होम्योपैथिक चिकित्सा के अग्रणी संसार
डॉ. रामरतन बनर्जी को होम्योपैथी के क्षेत्र में एक पथप्रदर्शक माना जाता है। उन्होंने 1975 से अपनी प्रैक्टिस शुरू की और 30 वर्षों से अधिक समय तक रोगियों के लिए प्राकृतिक उपचार के विकल्प प्रस्तुत करते रहे। उनके कार्यशालाओं और सेमिनारों ने युवा चिकित्सकों को प्रेरित किया, और उनकी रचनाएँ आज भी होम्योपैथिक शिक्षा में प्रमुख संदर्भ हैं। डॉ. बनर्जी का निधन स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बड़े शून्य को जन्म दिया, परंतु उनकी विरासत आज भी चिकित्सा समुदाय में जीवित है।
योगी की श्रद्धांजलि: फूलों की बरसात और गहरी संवेदना
मुख्यमंत्री योगी ने डॉ. बनर्जी के चित्र के सामने फूलों की एक सुंदर माला रखी और गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा, “डॉ. बनर्जी की मृत्यु हमारे समाज के लिए एक बड़ा आघात है, परंतु उनकी चिकित्सा और सेवा की भावना हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है।” यह दृश्य न केवल परिवार के लिए एक सांत्वना का क्षण था, बल्कि दर्शकों के लिए भी एक प्रेरणादायक संदेश।
परिवार को दिलासा: मुख्यमंत्री की हार्दिक दुआएँ और सहानुभूति
डॉ. बनर्जी के परिवार के सदस्यों के साथ मुख्यमंत्री ने समय निकाला और उन्हें हार्दिक दुआएँ दीं। उन्होंने परिवार से कहा, “आपको यह ज्ञान होना चाहिए कि डॉ. बनर्जी की सेवाएँ हमेशा याद रखी जाएँगी, और उनकी यादें हमारे दिलों में जीवित रहेंगी।” इस साक्षात्कार में परिवार ने मुख्यमंत्री के शब्दों को अत्यंत भावुकता से स्वीकार किया, और उनकी सहानुभूति को सराहा।
समुदाय पर असर: समाज में होम्योपैथी का स्थान और भविष्य
डॉ. बनर्जी की मृत्यु ने होम्योपैथी के प्रति समाज की दृष्टि पर पुनः प्रकाश डाला। मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार होम्योपैथी को और अधिक प्रोत्साहन देने के लिए नए योजनाएँ तैयार कर रही है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि डॉ. बनर्जी के कार्यों से प्रेरित होकर युवा चिकित्सकों को होम्योपैथी में प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह कदम न केवल चिकित्सा क्षेत्र में विविधता को बढ़ाएगा, बल्कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में रोगियों के लिए सुलभ विकल्प भी उपलब्ध कराएगा।
निष्कर्ष
डॉ. रामरतन बनर्जी की याद उनके परिवार, रोगियों और चिकित्सा समुदाय के लिए एक प्रेरणास्रोत बनी हुई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की श्रद्धांजलि और संवेदना ने इस शोकपूर्ण क्षण को एक सकारात्मक दिशा दी, जहाँ होम्योपैथी के महत्व को पुनः मान्यता मिली। डॉ. बनर्जी के योगदान और उनकी चिकित्सा दर्शन को आगे बढ़ाने के लिए सरकार और समाज दोनों को एकजुट होकर कार्य करना चाहिए, ताकि उनका कार्यकाल और भी अधिक लोगों तक पहुँच सके।


