प्राइवेट बस मालिकों की दुनिया में एक नया अध्याय खुल रहा है, जब 29 सितंबर 2026 को प्राइवेट बस ओनर्स एसोसिएशन के चेयरमैन थंगराज से मिले। 55 वर्षीय थंगराज जी, जो 30 से अधिक वर्षों से सार्वजनिक परिवहन के क्षेत्र में सक्रिय हैं, ने अपनी कंपनी के विकास, उद्योग की चुनौतियों और भविष्य की योजनाओं पर अपनी दृष्टि साझा की। इस साक्षात्कार में उन्होंने न केवल अपने व्यक्तिगत अनुभवों को उजागर किया, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए उपयोगी सुझाव भी दिए।
थंगराज जी की यात्रा: सड़कों से बोर्डरूम तक
थंगराज जी का सफर साधारण से शुरू हुआ, जब उन्होंने 1995 में अपनी पहली बस खरीदी। उस समय का परिवहन क्षेत्र अभी भी सरकारी नियंत्रण में था, पर उन्होंने निजी निवेश से अपनी कंपनी को विस्तार देने का निर्णय लिया। 2005 में उन्होंने अपने पहले 10 बसों के बेड़े को बढ़ाया, और 2015 में एसोसिएशन की स्थापना के बाद वे इसके चेयरमैन बने।
चुनौतियाँ और समाधान: इन्धन, नियम और प्रतिस्पर्धा
इन्धन की बढ़ती लागत, सख्त नियम और बड़े शहरों में निजी बसों के लिए सीमित मार्ग, ये सभी चुनौतियाँ हैं जिन्हें थंगराज जी ने मात दी। उन्होंने बताया, “हमने फ्लीट के लिए वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर शोध शुरू किया, जैसे हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिक बसें। साथ ही, हम सरकार के साथ मिलकर ‘स्मार्ट रूटिंग’ सिस्टम विकसित कर रहे हैं।”
डिजिटल परिवर्तन: ऐप्स, डेटा और ग्राहक अनुभव
आज का परिवहन क्षेत्र डिजिटल हो चुका है। थंगराज जी ने बताया कि उनके बेड़े में अब 150 से अधिक बसों पर GPS ट्रैकिंग और मोबाइल ऐप के जरिए रीयल‑टाइम अपडेट उपलब्ध है। “हमारे ग्राहकों को अब बस आने का समय, सीट उपलब्धता और रूट बदलने की सूचना तुरंत मिल जाती है,” उन्होंने कहा।
भविष्य की योजनाएँ: विस्तार और सामाजिक जिम्मेदारी
थंगराज जी के अनुसार, अगले पाँच वर्षों में कंपनी का बेड़ा 250 बसों तक बढ़ेगा। वे ‘ग्रीन ट्रांसपोर्ट’ को आगे बढ़ाने के लिए 100% इलेक्ट्रिक बसों का लक्ष्य रख रहे हैं। इसके अलावा, वे ग्रामीण क्षेत्रों में किफायती बस सेवाएँ शुरू करने की योजना बना रहे हैं, ताकि लोगों को बेहतर परिवहन सुविधा मिले।
निष्कर्ष
इस साक्षात्कार से यह स्पष्ट होता है कि प्राइवेट बस ओनर्स एसोसिएशन के चेयरमैन थंगराज जी न सिर्फ अपने उद्योग के लिए एक मार्गदर्शक हैं, बल्कि समाज के लिए भी एक प्रेरणास्रोत हैं। उनकी रणनीतिक सोच, नवाचार के प्रति समर्पण और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना, प्राइवेट बस उद्योग को नई ऊँचाइयों पर ले जाने के लिए प्रेरक हैं। उनकी दृष्टि से यह स्पष्ट है कि परिवहन क्षेत्र में निजी उद्यमों का महत्वपूर्ण योगदान आने वाले वर्षों में और बढ़ेगा।



