आग की घटना के बाद उठे गंभीर सवाल
नोएडा में हाल ही में हुई आगजनी की घटना के बाद नोएडा पीजी व्यवस्था एक बार फिर चर्चा में आ गई है। सुरक्षा मानकों की अनदेखी और बिना पंजीकरण संचालित हो रहे पीजी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
हजारों पीजी बिना पंजीकरण संचालित
जानकारी के अनुसार, शहर में पांच हजार से अधिक नोएडा पीजी संचालित हैं, लेकिन इनमें से एक भी पर्यटन विभाग में पंजीकृत नहीं है। ऐसे में हजारों छात्र और नौकरीपेशा लोग असुरक्षित भवनों में रहने को मजबूर हैं।
सुरक्षा व्यवस्था बेहद कमजोर
कई नोएडा पीजी ऐसे हैं जहां फायर सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। संकरे रास्ते, एकमात्र प्रवेश द्वार और आपातकालीन निकासी की व्यवस्था का अभाव बड़े हादसे का कारण बन सकता है। कई इमारतों में होटल और पीजी एक साथ संचालित किए जा रहे हैं।
आग लगने पर बढ़ सकता है खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी बहुमंजिला नोएडा पीजी में आग लगती है, तो लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना बेहद मुश्किल हो सकता है। कई क्षेत्रों में अग्निशमन वाहनों के पहुंचने तक की पर्याप्त जगह नहीं है।
अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि संबंधित विभागों को स्थिति की जानकारी होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। सुरक्षा नियमों के पालन की निगरानी भी पर्याप्त नहीं दिख रही है।
नियमों के तहत जरूरी है पंजीकरण
पर्यटन विभाग के अनुसार वर्तमान नियमों के तहत होम स्टे और बीएनबी के लिए पंजीकरण आवश्यक है। वहीं छह से अधिक कमरों वाले भवनों को निर्धारित मानकों का पालन करना होता है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में नोएडा पीजी बिना आवश्यक अनुमति और सुरक्षा मानकों के संचालित हो रहे हैं।
सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
आग की हालिया घटना के बाद नोएडा पीजी में रहने वाले लोगों और उनके परिवारों की चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते सुरक्षा मानकों को लागू नहीं किया गया तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है।



