संकष्टी चतुर्थी पर प्रकृति के संरक्षक व दिव्य ज्ञान के प्रतीक भगवान गणेश की उतारी आरती

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—नमामि गंगे के सदस्यों ने किया बड़ा गणेश का पूजन, धार्मिक स्थलों पर स्वच्छता बनाए रखने की अपील

वाराणसी,17 जनवरी (हि.स.)। माघ मास के लम्बोदर संकष्टी चतुर्थी पर शुक्रवार को नमामि गंगे के सदस्यों ने बड़ा गणेश मंदिर में सनातन धर्म के पंच देवताओं में प्रमुख व प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश की पूजा अर्चना कर सभी के कल्याण सुख – समृद्धि की कामना की। नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक राजेश शुक्ला के संयोजन में प्रकृति के संरक्षक व दिव्य ज्ञान के प्रतीक भगवान गणेश की पर्यावरण संरक्षण की कामना से आरती उतारी गई। लोक मंगल की कामना से गणेश जी को लड्डू, मोदक और तिलकुट का भोग लगाया गया। इस दौरान मंदिर परिसर जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा, वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ-निर्विघ्नं कुरुमे देव सर्वकार्येषु सर्वदा, प्रणम्य शीरसा देवं गौरी पुत्रम विनायकम जैसे श्लोकों से गूंजता रहा। इस अवसर पर राजेश शुक्ला ने कहा कि पुराणों में वर्णित भगवान श्री गणेश का स्वरूप एक ऐसा विराट रूप है जो प्रकृति और पर्यावरण के प्रति हमारी संवेदनाएं जगाता है और उनके प्रति हमें अपनी जिम्मेदारियों का बोध कराता है ।

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