क्या है ऑपरेशन मानसून?
- बरसात के मौसम में कॉर्बेट नेशनल पार्क पर्यटकों के लिए बंद रहता है।
- इसी समय शिकारियों की गतिविधियां बढ़ जाती हैं।
- बाघ, तेंदुआ, हाथी जैसे वन्यजीव मुख्य निशाने पर होते हैं।
➡️ इस स्थिति से निपटने के लिए हर साल “ऑपरेशन मानसून” शुरू किया जाता है।
👮♂️ 250 वनकर्मी तैनात, गश्त तेज
- लगभग 250 वनकर्मी पैदल गश्त कर रहे हैं।
- यह गश्त मुख्य रूप से दक्षिणी सीमा और संवेदनशील क्षेत्रों में केंद्रित है।
- कर्मचारी 24×7 ड्यूटी पर हैं, ताकि किसी भी घुसपैठ को रोका जा सके।
📡 तकनीक से निगरानी बढ़ी
बरसात के मौसम में रास्ते अक्सर ध्वस्त हो जाते हैं, जिससे फिजिकल पेट्रोलिंग कठिन हो जाती है। इस बार:
- ड्रोन कैमरे लगाए गए हैं।
- थर्मल इमेजिंग कैमरा से रात में भी निगरानी संभव है।
- हर 2 किमी पर वन चौकी बनाई गई है, जिनमें:
- राशन
- मेडिकल किट
- वायरलेस सेट
पहले से ही मौजूद हैं।
🗺️ कौन से क्षेत्र सबसे संवेदनशील हैं?
- कॉर्बेट पार्क की दक्षिणी सीमा, जो उत्तर प्रदेश से लगती है, सबसे अधिक संवेदनशील मानी जाती है।
- मुख्य खतरे वाले क्षेत्र:
- अमानगढ़
- अफजलगढ़
- नगीना
➡️ इन क्षेत्रों में अतिरिक्त चौकसी बरती जा रही है।
⛈️ 2025 में मानसून कब पहुंचा उत्तराखंड?
- मानसून भारत में हर साल केरल से जून के पहले सप्ताह में प्रवेश करता है।
- इस वर्ष उत्तराखंड में मानसून 15 जून के आसपास पहुंचा।
🛡️ वनकर्मियों को कड़े निर्देश
- कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक, डॉ. साकेत बड़ोला ने स्पष्ट कहा: “कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। ऑपरेशन मानसून के तहत शून्य सहनशीलता अपनाई जाएगी।”
🔚 निष्कर्ष
✅ ऑपरेशन मानसून सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि जंगल के लिए जीवनरक्षक अभियान है।
✅ यह प्राकृतिक और मानव निर्मित खतरों के बीच संतुलन बनाने का सशक्त प्रयास है।
✅ वन्यजीवों की सुरक्षा, संरक्षण, और संवेदनशील सीमा क्षेत्रों पर नियंत्रण इस मिशन का मुख्य उद्देश्य है।