Overcoming Guilt and Self Blame: अपराध बोध कैसे बनता है?
अपराध बोध ( Guilt and Self Blame ) अक्सर तब पैदा होता है जब:
- हम अपनी गलती को पहचान नहीं, पहचान बना लेते हैं
- “मुझसे गलती हुई” की जगह “मैं ही गलत हूं” सोचने लगते हैं
- दूसरों की उम्मीदों के बोझ तले खुद को कुचल देते हैं
धीरे-धीरे:
👉 आत्मविश्वास गिरता है
👉 फैसले लेने से डर लगता है
👉 आगे बढ़ने की इच्छा कमजोर हो जाती है
💔 गलती और अपराध बोध ( Guilt and Self Blame ) में फर्क समझिए
गलती:
- इंसान होने का प्रमाण
- सीखने का मौका
अपराध बोध:
- खुद को सज़ा देने की आदत
- बीते कल में फंसे रहने की कैद
गलती सुधारती है,
लेकिन अपराध बोध रोक देता है।
🌼 Mona Singh का नजरिया क्यों खास है?

Mona Singh मानती हैं कि:
“खुद को बार-बार दोषी मानना,
अपनी ही क्षमता पर शक करना है।”

उनके मुताबिक:
- आत्मस्वीकृति से आत्मविश्वास लौटता है
- खुद से ईमानदार बातचीत जरूरी है
- हर गलती को जीवन का अंत मानना खुद के साथ अन्याय है
🛠️ खुद को अपराध बोध से बाहर कैसे निकालें?
1. गलती स्वीकारें, खुद को नहीं नकारें
कहिए:
- “मुझसे गलती हुई”
ना कि - “मैं बेकार हूं”
2. बीते कल को सबक बनाइए, सज़ा नहीं
- लिखिए कि आपने क्या सीखा
- तय कीजिए कि अगली बार क्या अलग करेंगे
3. खुद से वही भाषा बोलिए जो किसी अपने से बोलते
अगर दोस्त गलती करे, तो आप उसे तोड़ते नहीं—
👉 फिर खुद के साथ ऐसा क्यों?
4. छोटी जीतों पर ध्यान दें
- हर दिन एक छोटा सही कदम
- हर कदम आत्मविश्वास लौटाता है
🌈 याद रखिए
आपकी गलती
👉 आपकी पहचान नहीं है।
आपका अतीत
👉 आपका भविष्य तय नहीं करता।
और खुद को माफ करना
👉 कमजोरी नहीं, परिपक्वता है।





