‘पगला घोड़ा’ के मंचन ने रिश्तों की जटिलताओं को जीवंत किया

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गुरुग्राम में रंगमंच का यादगार अनुभव
  • गुरुग्राम स्थित एसजीटी यूनिवर्सिटी में स्वयंभू फाउंडेशन ने “पगला घोड़ा” नाटक का मंचन किया।
  • यह नाटक प्रसिद्ध बांग्ला नाटककार बादल सरकार की कालजयी कृति है, जिसने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया।

नाटक की कहानी

  • श्मशान घाट की पृष्ठभूमि पर आधारित “पगला घोड़ा” चार पुरुषों की बातचीत के जरिए रिश्तों की जटिलताओं को उजागर करता है।
  • प्रेम, विरह, पाखंड, अकेलापन और पछतावा जैसे विषय संवादों और प्रतीकों से प्रभावशाली ढंग से सामने आए।
  • दर्शकों ने कहा कि नाटक ने जीवन के अनकहे पहलुओं पर सोचने को मजबूर कर दिया।
टीम और कलाकार
  • नाटक का निर्देशन साहिल खान ने किया और मार्गदर्शन दिनेश यादव ने दिया।
  • मुख्य भूमिकाओं में स़कीब सिद्दीकी, शिवा अंकित, आयुषी राठौर और अन्य कलाकारों ने सशक्त अभिनय से दर्शकों का दिल जीता।
  • सेट और लाइट डिजाइन से लेकर संगीत और मंच प्रबंधन तक पूरी टीम ने बेहतरीन तालमेल पेश किया।

दर्शकों की प्रतिक्रिया
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र और शिक्षक मौजूद रहे। कई छात्रों के लिए यह यूनिवर्सिटी में पहला लाइव थिएटर अनुभव था। नाटक खत्म होते ही सभागार तालियों से गूंज उठा।

संस्कृति और संदेश
आयोजकों ने कहा कि थिएटर केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि जीवन को नए दृष्टिकोण से सोचने की प्रेरणा है। “पगला घोड़ा” का यह मंचन न केवल कला का उत्सव बना, बल्कि रिश्तों की गहराइयों को भी उजागर कर गया।

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