उत्तर प्रदेश के औरैया–इटावा जिले में स्थित चंबल सेंचुरी क्षेत्र के पंचनद और भरेह संगम इन दिनों विदेशी पक्षियों की मधुर चहचहाहट से गुलजार हो गया है। सर्दी का मौसम शुरू होते ही रूस, साइबेरिया और मलेशिया से हजारों किलोमीटर की लंबी यात्रा तय कर ये प्रवासी पक्षी यहां पहुंचते हैं और संगम तट पर अद्भुत प्राकृतिक दृश्य रच देते हैं।
🐦 हजारों किलोमीटर की यात्रा कर पहुंचे मेहमान
अपने मूल देशों में जब बर्फबारी और कड़ाके की ठंड शुरू होती है, तब भोजन और प्रजनन मुश्किल हो जाता है। ऐसे में चंबल सेंचुरी की जल-भूमि, शांत वातावरण और प्रचुर आहार इन पक्षियों के लिए आदर्श बन जाता है। यही कारण है कि हर साल दिसंबर से फरवरी तक ये पक्षी यहां डेरा डालते हैं।
🌿 सुरक्षा और निगरानी में जुटा वन विभाग
विदेशी पक्षियों के आगमन को देखते हुए सेंचुरी विभाग ने निगरानी तेज कर दी है।
दरोगा प्रताप सिंह वर्मा, वीट प्रभारी रोहित सिंह यादव और नाविक अजय कुमार की टीम दिन-रात गश्त कर रही है। विशेष रूप से रात में पेट्रोलिंग कर शिकारी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है ताकि अंडों और नवजात पक्षियों को कोई नुकसान न हो।
🐣 यही होता है प्रजनन काल
दिसंबर से फरवरी तक यह इलाका प्रवासी पक्षियों के प्रजनन केंद्र में बदल जाता है। मादा पक्षी अंडे देती हैं और फरवरी–मार्च में बच्चे निकलते हैं। जब बच्चे उड़ान भरने लायक हो जाते हैं, तब ये पक्षी धीरे-धीरे अपने देशों की ओर लौट जाते हैं।
📍 ये क्षेत्र बने पक्षियों का ठिकाना
पक्षियों की बड़ी संख्या इन स्थानों पर देखी गई है —
भरेह संगम, पंचनद संगम, बबाईन पुल, पथर्रा, छिबरौली, पालीघार, सहसों और बरचोली।
🦢 प्रमुख विदेशी पक्षी
रेंजर कोटेश त्यागी के अनुसार यहां आने वाले प्रमुख पक्षी हैं —
रूडी शेलडक, पेंटेड स्टॉर्क, विसलिंग टील, ब्लैक आइबिस, बार-हेडेड गूज, ब्लैक नेक्ड स्टॉर्क, प्लेसिस गल, टेल टिंगो और कार्मोरेंट।
🌍 पर्यटन और जैव विविधता को बढ़ावा
पंचनद विदेशी पक्षी न केवल चंबल सेंचुरी की जैव विविधता को समृद्ध करते हैं, बल्कि यह क्षेत्र अब प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के लिए भी बड़ा आकर्षण बनता जा रहा है। संगम तट पर पंखों की सरसराहट और उड़ते पक्षियों का दृश्य किसी प्राकृतिक उत्सव से कम नहीं लगता।




