🔹 Patharughat Struggle पर मुख्यमंत्री सरमा की श्रद्धांजलि
असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने Patharughat Struggle के शहीद किसानों को श्रद्धांजलि दी।
उन्होंने इस ऐतिहासिक संग्राम को गौरवशाली लेकिन पीड़ादायक अध्याय बताया।
🔹 औपनिवेशिक अन्याय के खिलाफ किसानों का साहस
1894 का Patharughat Struggle औपनिवेशिक शोषण के खिलाफ किसानों के संघर्ष का प्रतीक है।
यह संघर्ष साहस, एकता और बलिदान की मिसाल माना जाता है।
🔹 समाज को प्रेरणा देने वाला इतिहास
मुख्यमंत्री ने कहा कि Patharughat Struggle आज भी लोगों को आत्मसम्मान और न्याय के लिए प्रेरित करता है।
इस संग्राम की स्मृति जन-जन के हृदय में जीवित बनी हुई है।
🔹 शहीद किसानों का अमर बलिदान
डॉ. सरमा ने कहा कि शहीद किसानों का देशप्रेम और त्याग आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगा।
Patharughat Struggle बलिदान और साहस की अमिट गाथा है।
🔹 असम के संघर्षशील चरित्र का प्रतीक
मुख्यमंत्री के अनुसार यह संग्राम असम के लोगों की गरिमा और अदम्य साहस को दर्शाता है।
Patharughat Struggle केवल इतिहास नहीं, बल्कि चेतना और आत्मसम्मान का प्रतीक है।
🔹 इतिहास से मिलने वाली सीख
विशेषज्ञों का मानना है कि Patharughat Struggle सामाजिक न्याय की भावना को मजबूत करता है।
यह घटना आज भी संघर्ष और अधिकारों की प्रेरणा देती है।
🔹 असम में स्मृति दिवस का महत्व
आज पूरे असम में Patharughat Struggle की स्मृति को सम्मान के साथ याद किया जा रहा है।
यह दिन शहीदों के प्रति कृतज्ञता और इतिहास के सम्मान का प्रतीक बन गया है।




