पीबीएम ट्रोमा हॉस्पिटल में प्रदेश की पहली ऑर्थो बायोलॉजिकल रिजनरेटिव केयर लैब का ट्रायल मंगलवार से

0
290

राजस्थान के चिकित्सा क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ने जा रही है। बीकानेर स्थित पीबीएम अस्पताल से जुड़े ट्रोमा हॉस्पिटल में प्रदेश की पहली ऑर्थो बायोलॉजिकल रिजनरेटिव केयर (OBRC) लैब का ट्रायल मंगलवार से शुरू किया जाएगा। यह लैब हड्डी, जोड़ और मस्क्यूलोस्केलेटल बीमारियों के इलाज में नई क्रांति लाने वाली मानी जा रही है।

ट्रोमा हॉस्पिटल प्रभारी एवं वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. बी.एल. खजोतिया ने बताया कि ओबीआरसी तकनीक शरीर की प्राकृतिक हीलिंग प्रक्रिया को सक्रिय कर क्षतिग्रस्त टिश्यू और हड्डियों को स्वयं रिपेयर करने में मदद करती है। इस प्रक्रिया में मरीज के अपने रक्त और बोन मैरो से प्राप्त तत्वों को संकेंद्रित कर उपचार किया जाता है।

रिसर्च और क्लीनिकल दोनों स्तर पर होगा उपयोग

डॉ. खजोतिया के अनुसार यह लैब केवल उपचार तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें रेजिडेंट डॉक्टरों द्वारा शोध कार्य भी किया जाएगा। यह तकनीक पिछले चार से पांच वर्षों से उनकी थीसिस के तहत उपयोग की जा रही थी, जिसमें बेहद सकारात्मक परिणाम मिले हैं। इस लैब को क्लिनिकल रिसर्च कमेटी की स्वीकृति भी प्राप्त है।

बिना ऑपरेशन होगा इलाज

वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय कपूर ने बताया कि यह मिनिमम इनवेसिव तकनीक है, जिसमें

  • न ऑपरेशन
  • न चीरा
  • न स्टेरॉयड
    की आवश्यकता होती है। यह एक ओपीडी आधारित डे-केयर प्रक्रिया है, जिसमें मरीज करीब एक घंटे में इलाज कराकर घर लौट सकता है।

इस तकनीक का उपयोग इन बीमारियों में किया जाएगा —

  • स्पोर्ट्स इंजरी
  • आर्थराइटिस
  • फ्रोजन शोल्डर
  • टेनिस व गोल्फर एल्बो
  • घुटना, हिप व एंकल दर्द
  • प्लांटर फेशियाइटिस
  • हड्डियों का डिले या नॉन यूनियन
  • डिस्क प्रोलैप्स

भामाशाह का सहयोग

डॉ. कपूर ने बताया कि इस लैब की स्थापना में नोखा के भामाशाह मघाराम कुलरिया का सहयोग रहा है, जिन्होंने आगे भी समर्थन देने का आश्वासन दिया है। भविष्य में यहां ऑर्थोपेडिक मेडिकल रिसर्च सेंटर भी स्थापित किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि डॉ. बी.एल. खजोतिया और डॉ. अजय कपूर पिछले कई वर्षों से इस अत्याधुनिक लैब की स्थापना के लिए प्रयासरत थे, जो अब साकार हो गया है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here