प्रधानमंत्री मोदी बोले- एआई जैसी तकनीक तभी सार्थक, जब हो समाज कल्याण के लिए उपयोग

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🤖 एआई का मानव-केंद्रित उपयोग जरूरी: प्रधानमंत्री

नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में नरेन्द्र मोदी ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसी उन्नत तकनीक तभी सार्थक है, जब उसका उपयोग समाज के व्यापक कल्याण के लिए किया जाए। उन्होंने बुद्धिमत्ता, तर्कशीलता और निर्णय क्षमता को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को जन-जन के लिए उपयोगी बनाने का आधार बताया।

🌐 इंडिया एआई इंपेक्ट समिट का उल्लेख

प्रधानमंत्री ने India AI Impact Summit का उल्लेख करते हुए कहा कि इस शिखर सम्मेलन का उद्देश्य एआई को सर्वजन हित में प्रभावी ढंग से लागू करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत तकनीक को मानव-केंद्रित दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ा रहा है।

📜 संस्कृत सुभाषित से दिया संदेश

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच X पर एक संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए बुद्धि के गुणों का उल्लेख किया—

“शुश्रूषा श्रवणं चैव ग्रहणं धारणां तथा।
ऊहापोहोऽर्थविज्ञानं तत्त्वज्ञानं च धीगुणाः॥”

उन्होंने कहा कि सीखने की इच्छा, ध्यानपूर्वक सुनना, समझना, तर्क करना और सत्य की पहचान जैसे गुण एआई के विकास और उसके जिम्मेदार उपयोग के लिए भी आवश्यक हैं।

🚜 शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि में बदलाव की उम्मीद

प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और सुशासन जैसे क्षेत्रों में एआई के माध्यम से सकारात्मक परिवर्तन संभव है। उन्होंने कहा कि तकनीकी दक्षता के साथ-साथ विवेक, नैतिकता और समाजहित की भावना भी उतनी ही आवश्यक है।

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