🇮🇳 प्रधानमंत्री मोदी का प्रेरक संदेश
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को देश के युवाओं को परिश्रम, अनुशासन और निरंतर प्रयास का मजबूत संदेश दिया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक प्रेरणादायक संस्कृत सुभाषित साझा किया और इसके अर्थ को सरल शब्दों में समझाया।
📜 संस्कृत सुभाषित का सार
प्रधानमंत्री ने लिखा:
“अनुत्थाने ध्रुवो नाशः प्राप्तस्यानागतस्य च।
प्राप्यते फलमुत्थानाल्लभते चार्थसम्पदम्॥”
इसका भावार्थ है—
प्रयास न करने पर वर्तमान उपलब्धियां भी नष्ट हो जाती हैं।
आलस्य से भविष्य की संभावनाएं खत्म हो जाती हैं।
निरंतर कर्म और उद्यम से ही सफलता मिलती है।
मेहनत से ही आर्थिक समृद्धि प्राप्त होती है।
👩🎓 युवाओं के लिए खास संदेश
प्रधानमंत्री का यह संदेश खासतौर पर युवाओं, छात्रों, स्टार्टअप संस्थापकों, श्रमिकों और पेशेवरों के लिए है। उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से कहा कि:
सफलता शॉर्टकट से नहीं मिलती।
मेहनत और धैर्य जरूरी है।
आत्मनिर्भर भारत के लिए कर्मशील पीढ़ी चाहिए।
🏗️ राष्ट्र निर्माण से जोड़
मोदी ने इस विचार को राष्ट्र निर्माण से जोड़ा। उनका संकेत था कि जब युवा परिश्रम करेंगे, तभी देश तेज गति से आगे बढ़ेगा। नवाचार, कौशल और उद्यमिता के लिए लगातार प्रयास जरूरी है।
🌱 व्यापक प्रभाव
यह संदेश केवल नौकरीपेशा लोगों तक सीमित नहीं है।
यह किसानों, व्यापारियों, छात्रों और उद्यमियों—सबके लिए समान रूप से प्रेरक है।
📌 निष्कर्ष
PM Modi message to youth का मूल सार यही है—
👉 उठो, काम करो, सीखो, आगे बढ़ो और देश को मजबूत बनाओ।




