नई दिल्ली, 05 फरवरी (हि.स.)।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जीवन में स्पष्ट सोच, ठोस निर्णय और अनुशासित कर्म के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि लगातार दुविधा में रहना व्यक्ति की मानसिक शक्ति को कमजोर कर देता है और उसे अपने लक्ष्य से भटका देता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक प्रेरणादायक संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए लिखा कि जब कोई व्यक्ति केवल विकल्पों में उलझा रहता है, तो उसकी सोच विकृत होने लगती है। वहीं, जब किसी कार्य की वास्तविक शुरुआत हो जाती है, तो चुनौतियां और भी गहरी तथा कठिन हो जाती हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे समय में अनुशासन, एकजुटता और अटल संकल्प ही सफलता का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
प्रधानमंत्री द्वारा साझा किया गया सुभाषित इस प्रकार है —
“विकल्पमात्रावस्थाने वैरूप्यं मनसो भवेत्।
पश्चान्मूलक्रियारम्भगम्भीरावर्तदुस्तरः॥”
इस सुभाषित का भावार्थ है कि केवल विकल्पों पर विचार करते रहने से मन भ्रमित और दुर्बल हो जाता है। लेकिन जब किसी कार्य की शुरुआत हो जाती है, तो आगे की राह चुनौतियों से भर जाती है, जिन्हें पार करने के लिए दृढ़ निश्चय, आत्मअनुशासन और मानसिक स्थिरता आवश्यक होती है।




