प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को सोमनाथ मंदिर को भारतीय संस्कृति और आत्मा की शाश्वत पहचान बताया। उन्होंने कहा कि यह मंदिर हमारी आध्यात्मिक शक्ति, आस्था और अटूट विश्वास का जीवंत प्रतीक है, जिसने इतिहास में अनेक आक्रमणों और विध्वंसों के बावजूद स्वयं को बार-बार पुनर्जीवित किया है।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर एक पोस्ट के माध्यम से यह भाव व्यक्त करते हुए एक प्राचीन संस्कृत श्लोक साझा किया:
वनानि दहतो वह्नेः सखा भवति मारुतः।
स एव दीपनाशाय कृशे कस्यास्ति सौहृदम्॥
इस श्लोक का अर्थ बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जैसे आग को हवा तेज कर देती है लेकिन वही हवा एक कमजोर दीपक को बुझा देती है, उसी तरह नफरत और उन्माद कुछ समय के लिए विनाश कर सकते हैं, लेकिन सत्य, विश्वास और शक्ति अंततः सृजन और निर्माण करते हैं।
उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर इसका जीवंत उदाहरण है, जो इतिहास में कई बार ध्वस्त होने के बावजूद हर बार पहले से अधिक भव्यता के साथ पुनर्निर्मित हुआ। यह मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि भारतीय संस्कृति की दृढ़ता, सहनशीलता और पुनर्जागरण की भावना का प्रतीक भी है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में यह भी कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत पर भले ही अनेक बार आघात हुए हों, लेकिन देशवासियों की सामूहिक चेतना और आस्था ने इसे हमेशा संरक्षित रखा है। यही शक्ति भारत को सदियों से आगे बढ़ाती रही है।




