🔹 ऐतिहासिक परंपरा की वापसी
प्रयागराज में Prayagraj Panchkoshi Parikrama की भव्य शुरुआत हो चुकी है।
यह परंपरा 556 साल पहले बंद कर दी गई थी, लेकिन अब फिर जीवित हुई है।
🔹 अकबर की पाबंदी
मुगल शासक अकबर ने इस परिक्रमा पर रोक लगा दी थी।
इसके कारण Prayagraj Panchkoshi Parikrama कई शताब्दियों तक स्थगित रही।
🔹 योगी सरकार की पहल
2019 में योगी सरकार ने इस परंपरा को फिर से शुरू किया।
इससे Prayagraj Panchkoshi Parikrama को नई पहचान मिली है।
🔹 माघ मेले से जुड़ाव
यह परिक्रमा माघ मेले की प्रमुख परंपराओं में से एक मानी जाती है।
इसलिए Prayagraj Panchkoshi Parikrama का विशेष धार्मिक महत्व है।
🔹 साधु संतों की भागीदारी
अखाड़ा परिषद और जूना अखाड़ा के साधु इसमें शामिल हुए।
इससे Prayagraj Panchkoshi Parikrama और भव्य बन गई।
🔹 पंच कोसी का महत्व
यह परिक्रमा कई तीर्थ और आश्रमों को जोड़ती है।
इससे Prayagraj Panchkoshi Parikrama आध्यात्मिक लाभ देती है।
🔹 अक्षय पुण्य की प्राप्ति
मान्यता है कि इस परिक्रमा से अक्षय पुण्य फल मिलता है।
इसी कारण Prayagraj Panchkoshi Parikrama को बेहद शुभ माना जाता है।
🔹 आस्था का संगम
यह परंपरा सनातन संस्कृति और चेतना की प्रतीक है।
इसलिए Prayagraj Panchkoshi Parikrama हर श्रद्धालु के लिए खास बन गई है।




