स्व. अनि चौरसिया की प्रतिमा पर माल्यापर्ण करते रघुवर दास, सांसद, मेयर एवं अन्य
रांची में स्व. अनि चौरसिया की प्रतिमा पर माल्यापर्ण का आयोजन
रांची, 15 जून 2024 – झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. अनि चौरसिया की प्रतिमा पर माल्यापर्ण का आयोजन रांची में किया गया। इस आयोजन में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, सांसद सुनील सोरेन, रांची के मेयर अश्विन प्रसाद, और अन्य राजनेताओं ने भाग लिया।
रघुवर दास ने की प्रतिमा पर माल्यापर्ण
प्रतिमा पर माल्यापर्ण के अवसर पर रघुवर दास ने कहा कि स्व. अनि चौरसिया एक महान नेता थे जिन्होंने झारखंड के लिए बहुत कुछ किया। उन्होंने कहा कि उनकी प्रतिमा पर माल्यापर्ण करने से हम उनकी याद में विनम्र हो रहे हैं।
सांसद सुनील सोरेन ने की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि
सांसद सुनील सोरेन ने कहा कि स्व. अनि चौरसिया एक महान नेता थे जिन्होंने झारखंड के लिए बहुत कुछ किया। उन्होंने कहा कि उनकी प्रतिमा पर माल्यापर्ण करने से हम उनकी याद में विनम्र हो रहे हैं।
रांची के मेयर अश्विन प्रसाद ने की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि
रांची के मेयर अश्विन प्रसाद ने कहा कि स्व. अनि चौरसिया एक महान नेता थे जिन्होंने झारखंड के लिए बहुत कुछ किया। उन्होंने कहा कि उनकी प्रतिमा पर माल्यापर्ण करने से हम उनकी याद में विनम्र हो रहे हैं।
अन्य राजनेताओं ने भी की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि
इस आयोजन में अन्य राजनेताओं ने भी स्व. अनि चौरसिया की प्रतिमा पर माल्यापर्ण किया। उन्होंने कहा कि स्व. अनि चौरसिया एक महान नेता थे जिन्होंने झारखंड के लिए बहुत कुछ किया।
आयोजन का उद्देश्य
आयोजन का उद्देश्य स्व. अनि चौरसिया की याद में विनम्र होना और उनके योगदान को याद करना था। आयोजन में शामिल लोगों ने कहा कि स्व. अनि चौरसिया की प्रतिमा पर माल्यापर्ण करने से हम उनकी याद में विनम्र हो रहे हैं।
आयोजन की सफलता
आयोजन की सफलता के बारे में बात करते हुए, आयोजकों ने कहा कि आयोजन को बहुत अच्छी तरह से आयोजित किया गया था। उन्होंने कहा कि आयोजन में शामिल लोगों ने स्व. अनि चौरसिया की प्रतिमा पर माल्यापर्ण किया और उनकी याद में विनम्र हुए।
निष्कर्ष
स्व. अनि चौरसिया की प्रतिमा पर माल्यापर्ण का आयोजन रांची में किया गया। इस आयोजन में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, सांसद सुनील सोरेन, रांची के मेयर अश्विन प्रसाद, और अन्य राजनेताओं ने भाग लिया। आयोजन का उद्देश्य स्व. अनि चौरसिया की याद में विनम्र होना और उनके योगदान को याद करना था।



