राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: टीएसपी कांस्टेबल्स को ट्राइबल क्षेत्रों में भेजने के आदेश
जोधपुर, 29 नवम्बर (हि.स.)। राजस्थान हाईकोर्ट ने ट्राइबल सब-प्लान (टीएसपी) क्षेत्र के 63 कांस्टेबलों को बड़ी राहत देते हुए राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को निर्देश दिया है कि उनकी तैनाती ट्राइबल इलाकों में की जाए। जस्टिस फरजंद अली ने अपने रिपोर्टेबल जजमेंट में कहा कि मिनरल प्रोटेक्शन फोर्स के नाम पर भर्ती कर टीएसपी श्रेणी में चयनित इन अभ्यर्थियों को जयपुर स्थित 14वीं बटालियन आरएसी में अटका देना वैध अपेक्षाओं के खिलाफ है।
भर्ती टीएसपी क्षेत्रों के लिए हुई, पोस्टिंग नॉन-टीएसपी में
याचिकाकर्ता बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, उदयपुर समेत दक्षिणी राजस्थान के आदिवासी क्षेत्रों के स्थायी निवासी हैं। उन्होंने 2013 में निकले मिनरल प्रोटेक्शन फोर्स विज्ञापन में टीएसपी कोटे में चयनित होने के बावजूद नॉन-टीएसपी कैडर में तैनाती का विरोध किया। 1000 पदों में से 80 पद टीएसपी क्षेत्र के लिए आरक्षित थे।
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने 2014 और 2018 के सर्कुलरों के अनुसार ट्राइबल एरिया ट्रांसफर हेतु आवेदन दिए, लेकिन उन पर कोई निर्णय नहीं हुआ, जबकि समान मामलों में अन्य उम्मीदवारों को लाभ मिला।
सरकार का पक्ष
राज्य सरकार ने दलील दी कि नियुक्ति उस समय उपलब्ध रिक्तियों, मेरिट और प्रशासनिक आवश्यकता के आधार पर हुई थी। ट्रांसफर कोई अधिकार नहीं, बल्कि प्रशासनिक विवेक है, और सीमित रिक्तियों के कारण सभी को ट्राइबल क्षेत्रों में भेजना संभव नहीं था।
कोर्ट की टिप्पणी: “लीजिटिमेट एक्सपेक्टेशन का हनन”
हाईकोर्ट ने कहा कि जब भर्ती विशेष रूप से ट्राइबल/मिनरल क्षेत्रों से जुड़ी हो, तो चयनित अभ्यर्थियों को यह वैध अपेक्षा होती है कि उनकी पोस्टिंग भी उन्हीं क्षेत्रों में होगी। जस्टिस अली ने आदिवासी समुदायों की सामाजिक संवेदनशीलता का उल्लेख करते हुए राज्य को अधिक सहानुभूतिपूर्ण रुख अपनाने की सलाह दी।




