🔹 ड्रेजिंग शुरू, मजदूरों की रोजी-रोटी ठप
Rupnarayan Dredging Impact का असर कोलाघाट क्षेत्र में साफ दिख रहा है।
राज्य सरकार द्वारा रूपनारायण नदी में ड्रेजिंग शुरू होने के बाद करीब 200–250 बालू मजदूर बेरोजगार हो गए हैं।
पीढ़ियों से नदी से बालू निकालकर जीवनयापन करने वाले परिवारों का काम अचानक बंद हो गया है।
🔹 अधिकृत एजेंसी को ही अनुमति
सिंचाई विभाग ने ड्रेजिंग का कार्य एक बहुराष्ट्रीय कंपनी को सौंपा है।
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अधिकृत एजेंसी के अलावा कोई भी बालू नहीं निकाल सकेगा।
हाल ही में नियम उल्लंघन के आरोप में एक मजदूर को गिरफ्तार कर तीन नावें जब्त की गईं।
Rupnarayan Dredging Impact के बाद मजदूरों में भय और असंतोष बढ़ा है।
🔹 परंपरागत आजीविका पर असर
मारबेड़िया, नगुरिया, शालुका, पाइकरपाड़ी, छातिंदा और बेलकोठा के मजदूर वर्षों से नदी से बालू निकालते रहे हैं।
एक नाव बालू बेचने पर उन्हें 300–400 रुपये तक मिलते थे।
अब Rupnarayan Dredging Impact के कारण पिछले एक महीने से बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार हैं।
🔹 प्रशासन को सौंपा ज्ञापन
मजदूरों ने राज्य सचिवालय नवान्न को पत्र भेजकर पारंपरिक अधिकार बहाल करने की मांग की है।
विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी को भी ज्ञापन सौंपा गया है।
कोलाघाट के बीडीओ अमिय कुमार चांद ने बताया कि मामला भूमि विभाग को भेजा गया है।
🔹 राजस्व देने को भी तैयार
मजदूरों का कहना है कि उन्हें ड्रेजिंग से आपत्ति नहीं है, लेकिन आजीविका समाप्त न की जाए।
Rupnarayan Dredging Impact के बीच उन्होंने सरकार को राजस्व देने की भी पेशकश की है।



