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शार्मिष्ठा पानोली की जमानत याचिका खारिज, हाई कोर्ट ने कहा- अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अर्थ दूसरों की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं

कोलकाता, 3 जून (हि.स.)। सोशल मीडिया पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से जुड़े वीडियो में विशेष समुदाय के खिलाफ कथित विवादास्पद टिप्पणी को लेकर गिरफ़्तार 22 वर्षीय कानून की छात्रा और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर शार्मिष्ठा पानोली को कलकत्ता हाई कोर्ट ने मंगलवार को अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई पांच जून को निर्धारित की है और पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया है कि वह संबंधित केस पर डायरी पेश करे।

अवकाशकालीन पीठ ने यह भी आदेश दिया कि पानोली के विरुद्ध केवल गार्डनरीच पुलिस थाना क्षेत्र में दर्ज प्राथमिक मामला ही जांच की प्रक्रिया में आगे बढ़ेगा, जबकि अन्य सभी एफआईआर पर अगले आदेश तक रोक लगी रहेगी। कोर्ट ने राज्य सरकार को इस विषय में कोई नई एफआईआर दर्ज नहीं करने का निर्देश भी दिया है।

न्यायमूर्ति पार्थ सारथी मुखर्जी ने अपनी टिप्पणी में कहा कि “हमारे देश की विविधता को ध्यान में रखते हुए सार्वजनिक मंचों पर बोलते समय विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता संविधान का दिया हुआ अधिकार है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हम दूसरों की धार्मिक या सामाजिक भावनाओं को ठेस पहुंचाएं।”

शार्मिष्ठा की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारत और पाकिस्तान के यूज़र्स के बीच सोशल मीडिया पर तीखी बहस हो रही थी और इसी क्रम में उनकी मुवक्किल की एक पोस्ट सामने आई। उन्होंने यह भी दावा किया कि एफआईआर में कथित तौर पर न तो किसी संज्ञेय अपराध का उल्लेख है और न ही स्पष्ट रूप से यह बताया गया है कि आरोपित ने ऐसा क्या कहा जिससे धार्मिक भावना आहत हुई।

वकील ने आगे बताया कि यह वीडियो 07 मई की रात को पोस्ट किया गया था, जिसे अगले ही दिन यानी 08 मई को हटा दिया गया था। इसके बावजूद 15 मई को शिकायत दर्ज हुई और 17 मई को गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया गया।

शार्मिष्ठा पानोली को गुरुग्राम से गिरफ़्तार कर कोलकाता लाया गया और उन्हें 13 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। उनके वकील के अनुसार, उनके खिलाफ राज्य के विभिन्न थानों में चार एफआईआर दर्ज हैं, जिनमें से फिलहाल केवल एक पर कार्यवाही आगे बढ़ रही है।

राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने अदालत को बताया कि शिकायत में संज्ञेय अपराध की पुष्टि होती है और आरोपित की पोस्ट में आपत्तिजनक वीडियो और टेक्स्ट दोनों सम्मिलित थे। उन्होंने बताया कि मजिस्ट्रेट ने पहले ही उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है।

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