🔹 चौंकाने वाले आंकड़े
शिमला में Shimla Drugs Case से बड़ा सच सामने आया है।
पांच साल में 391 ड्रग तस्कर पकड़े गए।
🔹 सजा दर बेहद कम
इनमें से सिर्फ 98 मामलों में सजा हुई।
मतलब दोषसिद्धि दर केवल 26 प्रतिशत रही।
🔹 ज्यादातर बरी
293 आरोपियों को अदालत से राहत मिली।
पुलिस कार्रवाई के बावजूद वे बच गए।
🔹 कब कितनी सजा
2021 में 20 में से 5 को सजा मिली।
2022 में 29 में से सिर्फ 9 दोषी ठहरे।
🔹 हालात और बिगड़े
2023 में 91 में से 21 को सजा मिली।
2024 में 107 में से केवल 25 दोषी बने।
🔹 2025 की तस्वीर
2025 में 144 केस दर्ज हुए।
इनमें सिर्फ 38 में ही सजा हो पाई।
🔹 कार्यशाला में चर्चा
जिला स्तर पर विशेष बैठक बुलाई गई।
इसमें Shimla Drugs Case की समीक्षा हुई।
🔹 कौन-कौन शामिल हुआ
एसडीएम, डीएसपी और थाना प्रभारी आए।
अभियोजन और स्वास्थ्य अधिकारी भी थे।
🔹 क्यों फेल होते केस
जांच में तकनीकी खामियां सामने आईं।
सबूत अदालत में मजबूत नहीं रहे।
🔹 पॉक्सो का भी हाल
पांच साल में 138 पॉक्सो केस चले।
सिर्फ 49 में दोषसिद्धि हो सकी।
🔹 प्रशासन की चिंता
डीसी अनुपम कश्यप ने चिंता जताई।
उन्होंने कहा—न्याय में देरी सही नहीं।
🔹 पुलिस की चुनौती
एसएसपी संजीव गांधी ने बात मानी।
उन्होंने बेहतर जांच पर जोर दिया।
🔹 क्या सुधार चाहिए
फॉरेंसिक और दस्तावेज मजबूत हों।
गवाह सुरक्षा भी जरूरी मानी गई।
🔹 जनता पर असर
कम सजा से अपराधियों का डर घटता है।
लोगों का भरोसा भी कमजोर पड़ता है।
🔹 आगे की रणनीति
पुलिस अब प्रशिक्षण बढ़ाएगी।
मामलों की गुणवत्ता सुधारी जाएगी।
🔹 कुल मिलाकर
Shimla Drugs Case ने सिस्टम को आईना दिखाया।
अब सुधार के बिना बदलाव मुश्किल है।




