STT Impact on Stock Market: इतना डर क्यों?
STT यानी Securities Transaction Tax वह टैक्स है जो:
- शेयर खरीदने
- बेचने
- डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग
पर लगाया जाता है।
जब भी STT बढ़ाने या बदलने की बात आती है:
- ट्रेडर्स घबरा जाते हैं
- शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग घट जाती है
- बाजार में अचानक बिकवाली बढ़ जाती है
इसीलिए कहा जाता है कि STT का एक ऐलान बाजार को झटका दे सकता है।
🧠 BSE CEO का नजरिया: डर नहीं, मौका समझिए
BSE के MD और CEO सुंदरारमन राममूर्ति के मुताबिक:
👉 STT में बदलाव का मकसद बाजार को कमजोर करना नहीं
👉 बल्कि स्पेकुलेशन (सट्टा) कम करना है
उनका मानना है कि:
- कम शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग
- ज्यादा लॉन्ग-टर्म इनवेस्टमेंट
= ज्यादा स्थिर और हेल्दी मार्केट
यानी जो निवेशक तेज़ मुनाफे के लिए आते हैं, वे धीरे-धीरे बाहर होंगे,
और जो भरोसे के साथ लंबे समय के लिए निवेश करते हैं, उन्हें बढ़ावा मिलेगा।
⏳ शॉर्ट टर्म बनाम लॉन्ग टर्म: असली खेल
आज बाजार में:
- बड़ी संख्या में लोग Intraday और F&O पर निर्भर हैं
- उतार-चढ़ाव ज्यादा है
- रिटेल निवेशक ज्यादा नुकसान झेलता है
अगर STT में बदलाव होता है:
- बार-बार खरीद-बिक्री महंगी होगी
- लोग सोच-समझकर निवेश करेंगे
- कंपनियों में विश्वास आधारित निवेश बढ़ेगा
यही वजह है कि BSE CEO इसे लॉन्ग टर्म इनवेस्टर्स के लिए पॉजिटिव मानते हैं।
💥 फिर बाजार टूटने की बात क्यों?
क्योंकि:
- बाजार बदलाव से डरता है
- ट्रेडर्स को मुनाफा घटने का डर होता है
- अफवाहें बिकवाली को बढ़ा देती हैं
लेकिन इतिहास गवाह है:
👉 हर बड़ा सुधार पहले डर पैदा करता है, बाद में मजबूती लाता है।
📈 आम निवेशक के लिए इसका मतलब क्या?
अगर आप:
- SIP करते हैं
- लॉन्ग टर्म शेयर होल्ड करते हैं
- फंडामेंटल पर भरोसा रखते हैं
तो STT में बदलाव:
👉 आपके लिए खतरा नहीं, बल्कि फिल्टर है
जो सट्टेबाज़ी को अलग करता है और निवेश को मजबूत करता है।
🧠 सोचने वाली बात (यहीं फैसला होता है)
खुद से ईमानदारी से पूछिए:
- क्या आप बाजार में कम समय के लालच के लिए हैं?
- या लंबे समय की संपत्ति बनाने आए हैं?
- अगर बाजार 2–3 दिन टूट जाए, तो क्या आपकी रणनीति भी टूट जाती है?
- और सबसे बड़ा सवाल—
👉 क्या आप निवेशक हैं, या सिर्फ भीड़ का हिस्सा?





